Monday, April 7, 2014

1962 INDO-CHINA WAR LOST BY NEHRU HOW??


 यहाँ click करे !
http://www.youtube.com/watch?v=zUbgUfTOK0Q
 Photo: पूरी post नहीं पढ़ सकते तो यहाँ click करे !
http://www.youtube.com/watch?v=zUbgUfTOK0Q

..1966.. के पाकिस्तान के भारत पर होने वाले हमले से  पूर्व चीन ने  भारत पर हमला किया था 1962 ने ! 
और ये बहुत दुर्भाग्यपूर्ण हमला था ! इसको इसलिए दुर्भाग्यपूर्ण माना जाता है कि उस समय vk krishna menon जैसा नेता भारत का रक्षा मंत्री था !!

दुर्भाग्यपूर्ण वाली बात ये है कि VK krishan  menon थे तो  भारत के रक्षा मंत्री लेकिन हमेशा विदेश घूमते रहते थे ! उनको हिदुस्तान रहना अच्छा ही नहीं लगता था आमेरिका अच्छा लगता था !फ्रांस अच्छा लगता था !ब्रिटेन अच्छा लगता था ! नुयोर्क उनको हमेशा अच्छा लगता था ! उनकी तो मजबूरी थी कि भारत मे पैदा हो गए थे ! लेकिन हमेशा उनको विदेश रहना और वहाँ घूमना ही अच्छा लगता था ! और जो काम उनको रक्षा मंत्री का सौंपा गया था उसको छोड़ वो बाकी सब काम करते थे ! विदेश मे घूमते रहना !कभी किसी देश कभी किसी देश मे जाकर कूट नीति ब्यान दे देना ! !

और ये किस तरह के अजीब किसम के आदमी थे !आप इस बात से अंदाजा लगा सकते है ! 1960 -61 मे एक बार संसद मे बहस हो रही थी तो वीके कृशन ने खड़े होकर अपनी तरफ से एक प्रस्ताव रखा ! 

प्रस्ताव क्या रखा ??

उन्होने कहा देखो जी पाकिस्तान ने तो 1948 मे हमसे समझोता कर लिया कि वह आगे से कभी  हम पर हमला नहीं करेगा ! और दुनिया के आजू-बाजू मे और कोई हमारा दुश्मन है नहीं ! तो हमे बार्डर पर सेना रखने कि क्या जरूरत है सेना हटा देनी चाहिए ! ऐसे उल्टी बुद्धि के आदमी थे vk krishan menon ! और ये बात वो कहीं साधारण सी बैठक मे नहीं लोकसभा मे खड़े होकर बोल रहे थे ! कि ये सेना हमको हटा देनी चाहिए ! इसकी जरूरत नहीं है !!

तो कुछ सांसदो मे सवाल किया कि अगर भविष्य मे किसी देश ने हमला कर दिया तो कया करेंगे ???? अभी तो आप बोल रहे है कि सेना हटा लो ! पर अमरजनसी जरूरत पड़ गई तो कया करेंगे ???
तो उन्होने ने कहा इसके लिए पुलिस काफी है ! उसी से काम चला लेगे ! ऐसा जवाब vk krishann manon ने दिया !!

ऐसी ही एक बार कैबनेट कि मीटिंग थी प्रधान मंत्री और बाकी कुछ मंत्री माजूद थे ! vk kirshan ने एक प्रस्ताव फिर लाया और कहा ! देखो जी हमने सीमा से सेना तो हटा ली है ! अगर सेना नहीं रखनी तो पैसे खर्च करने कि क्या जरूरत है ! तो बजट मे से सेना का खर्च भी कम कर दिया ! 

और तो और एक और मूर्खता वाला काम किया ! उन्होने कहा अगर सेना ही नहीं है तो ये बंब,बंदुके 
बनाने की क्या जरूरत है ! तो गोला बारूद बनाने वाले कारखानो मे उत्पादन पर रोक लगा दी और वहाँ काफी बनाने के प्याले चाय बनाने के प्याले आदि का काम शुरू करवा दिया !!

और उनको जो इस तरह के बयान आते थे तो चीन को लगा कि ये तो बहुत मूर्ख आदमी है ! कहता है सेना को हटा लो ! सेना का खर्चा कम कर दो ! गोला बारूद बनाना बंद कर दो ! और खुद दुनिया भर मे घूमता रहता है ! कभी सेना के लोगो के पास न जाना ! सेना के साथ को meeting न करना ! इस तरह के काम करते रहते थे !

तो चीन को मौका मिल गया ! और चीन एक मौका ये भी मिल गया !चीन को लगा की vk kirashan तो प्रधानमंत्री (नेहरू ) के आदमी है !! तो शायद नेहरू की भी यही मान्यता होगी ! क्यूंकि vk krishan नेहरू का खास दोस्त था तो नेहरू ने उसको रक्षा मंत्री बना दिया था ! वरना vk krishan कोई  बड़ा नेता नहीं था देशा का ! जनता मे कोई उनका प्रभाव नहीं था ! बस नेहरू की दोस्ती ने उनको रक्षा मंत्री बना दिया !!

और वो हमेशा जो भाषण देते थे !लंबा भाषण देते थे 3 घंटे 4 घंटे ! लेकिन आप उनके भाषण का सिर पैर नहीं निकाल सकते थे कि उन्होने बोला क्या ! ऐसे मूर्ख व्यक्ति थे vk krishan menon !

तो ये सब मूर्खता देख कर चीन ने भारत पर हमला किया और भारत का एक इलाका था aksai chin ! 
वहाँ चीन ने पूरी ताकत से हमला किया ! और हालात क्या थे आप जानते है ! सेना को वापिस बुला लिया था पहले ही !! सेना का बजट कम था ! गोला बारूद के कारखाने बंद थे !! तो चीनी सैनिको ने बहुत मनमानी कि उस askai chin के क्षेत्र मे !!

और जो सबसे बुरा काम किया ! चीनी सैनिको ने सैंकड़ों महिलाओ के साथ जमकर बलत्कार किए !! वहाँ हजारो युवको कि ह्त्या करी ! askai chin का जो इलाका है वहाँ सुविधाए कुछ ऐसे है कि लोग वैसे ही अपना जीवन मुश्किल से जी पाते है ! रोज का जीवन चलाना ही उनको लिए किसी युद्ध से कम नहीं होता ऊपर से चीन का हमला !!

तो वहाँ के लोगो ने उस समय बहुत बहुत दुख झेला ! और वहाँ हमारी सेना नहीं थी ! तो वहाँ लोगो के मन हमारी सरकार के विरुद्ध एक विद्रोह की भावना उतपन हुई ! और वो आज भी झलकती  है ! आज भी आप वहाँ जाये तो वहाँ लोग ये सवाल करते है कि जब चीन ने हमला किया था तो आपकी सेना कहाँ थी ! और सच है हम लोगो के पास इसका कोई जवाब नहीं ! तो उनमे एक अलगाव कि भावना उतपन हुई जो अलग क्षेत्र की मांग करने लगे !!!

तो हमले मे चीन ने हमारी 72 हजार वर्ग मील जमीन पर कब्जा कर लिया ! और हमारा तीर्थ स्थान कैलाश मानसरोवर भी  चीन के कब्जे मे चला गया ! और बहुत शर्म कि बात है आज हमे अपने तीर्थ स्थान पर जाने के लिए  चीन से आज्ञा लेनी पड़ती है ! और इसके जिम्मेदार सिर्फ और सिर्फ नेहरू और vk krishan menon  जैसे घटिया और मूर्ख किसम के नेता थे !!!
__________________________
__________________________
तो युद्ध के बाद एक बार संसद मे भारत-चीन युद्ध पर चर्चा हुई ! सभी सांसदो के मुह से जो एक स्वर सुनाई दे रहा था ! वो यही था !कि किसी भी तरह चीन के पास गई 72 हजार वर्ग मील जमीन और हमारा तीर्थ स्थान कैलाश मानसरोवर वापिस आना चाहिए ! 

महावीर त्यागी जी जो उस समय के बहुत महान नेता थे !उन्होने ने सीधा नेहरू को कहा कि आप ही थे जिनहोने सेना हटाई ! सेना का बजट कम किया ! गोला बारूद बनाने के कारखाने बंद करवाये! आप ही के लोग विदेशो मे घूमा करते थे ! और आपकी इन गलितयो ने चीन को मौका मिला और उसमे हमला किया और हमारी 72 हजार वर्ग मील जमीन पर कब्जा कर लिया !!

अब आप ही बताए कि आप ये  72 हजार वर्ग मील जमीन को कब वापिस ला रहे है ?????!

तो इस हरामखोर नेहरू का जवाब सुनिए ! नेहरू ने कहा फिर क्या हुआ अगर वो जमीन चली गई ! चली गई तो चली गई ! वैसे भी बंजर जमीन थी घास का टुकड़ा नहीं उगता था ! ऐसी जमीन के लिए क्या चिंता करना !!

तो त्यागी जी ने बहुत ही बढ़िया जवाब दिया ! त्यागी जी ने कहा नेहरू जी उगता तो आपके सिर पर भी कुछ नहीं ! तो इसको भी काट कर चीन को देदो ! और इत्फ़ाक से नेहरू उस समय पूरी तरह गंजा हो चुका था !! :P

तो दोस्तो इस नेहरू ने धरती माँ को एक जमीन का टुकड़ा मान लिया ! और अपनी गलती मानने के बजाय ! उल्टा ब्यान दे रहा है जमीन चली गई तो चली गई !

इससे ज्यादा घटिया बात कुछ और नहीं हो सकती ! !

और लानत है भारत की जनता पर आज चीन युद्ध के 50 साल बाद भी नेहरू परिवार के वंशज देश चला रहे हैं !! हमे दिन रात लूट रहे हैं !हमे मूर्ख बना रेह हैं ! 
____________

आपने पूरी post पढ़ी बहुत बहुत धन्यवाद !
अमर शहीद राजीव दीक्षित जी की जय !!

1962 का युद्ध सारी घटना यहाँ देखे !!
must click here !!

http://www.youtube.com/watch?v=zUbgUfTOK0Q


वन्देमातरम !!!!

 ..1966.. के पाकिस्तान के भारत पर होने वाले हमले से पूर्व चीन ने भारत पर हमला किया था 1962 ने !
और ये बहुत दुर्भाग्यपूर्ण हमला था ! इसको इसलिए दुर्भाग्यपूर्ण माना जाता है कि उस समय vk krishna menon जैसा नेता भारत का रक्षा मंत्री था !!

दुर्भाग्यपूर्ण वाली बात ये है कि VK krishan menon थे तो भारत के रक्षा मंत्री लेकिन हमेशा विदेश घूमते रहते थे ! उनको हिदुस्तान रहना अच्छा ही नहीं लगता था... आमेरिका अच्छा लगता था !फ्रांस अच्छा लगता था !ब्रिटेन अच्छा लगता था ! नुयोर्क उनको हमेशा अच्छा लगता था ! उनकी तो मजबूरी थी कि भारत मे पैदा हो गए थे ! लेकिन हमेशा उनको विदेश रहना और वहाँ घूमना ही अच्छा लगता था ! और जो काम उनको रक्षा मंत्री का सौंपा गया था उसको छोड़ वो बाकी सब काम करते थे ! विदेश मे घूमते रहना !कभी किसी देश कभी किसी देश मे जाकर कूट नीति ब्यान दे देना ! !

और ये किस तरह के अजीब किसम के आदमी थे !आप इस बात से अंदाजा लगा सकते है ! 1960 -61 मे एक बार संसद मे बहस हो रही थी तो वीके कृशन ने खड़े होकर अपनी तरफ से एक प्रस्ताव रखा !

प्रस्ताव क्या रखा ??

उन्होने कहा देखो जी पाकिस्तान ने तो 1948 मे हमसे समझोता कर लिया कि वह आगे से कभी हम पर हमला नहीं करेगा ! और दुनिया के आजू-बाजू मे और कोई हमारा दुश्मन है नहीं ! तो हमे बार्डर पर सेना रखने कि क्या जरूरत है सेना हटा देनी चाहिए ! ऐसे उल्टी बुद्धि के आदमी थे vk krishan menon ! और ये बात वो कहीं साधारण सी बैठक मे नहीं लोकसभा मे खड़े होकर बोल रहे थे ! कि ये सेना हमको हटा देनी चाहिए ! इसकी जरूरत नहीं है !!

तो कुछ सांसदो मे सवाल किया कि अगर भविष्य मे किसी देश ने हमला कर दिया तो कया करेंगे ???? अभी तो आप बोल रहे है कि सेना हटा लो ! पर अमरजनसी जरूरत पड़ गई तो कया करेंगे ???
तो उन्होने ने कहा इसके लिए पुलिस काफी है ! उसी से काम चला लेगे ! ऐसा जवाब vk krishann manon ने दिया !!

ऐसी ही एक बार कैबनेट कि मीटिंग थी प्रधान मंत्री और बाकी कुछ मंत्री माजूद थे ! vk kirshan ने एक प्रस्ताव फिर लाया और कहा ! देखो जी हमने सीमा से सेना तो हटा ली है ! अगर सेना नहीं रखनी तो पैसे खर्च करने कि क्या जरूरत है ! तो बजट मे से सेना का खर्च भी कम कर दिया !

और तो और एक और मूर्खता वाला काम किया ! उन्होने कहा अगर सेना ही नहीं है तो ये बंब,बंदुके
बनाने की क्या जरूरत है ! तो गोला बारूद बनाने वाले कारखानो मे उत्पादन पर रोक लगा दी और वहाँ काफी बनाने के प्याले चाय बनाने के प्याले आदि का काम शुरू करवा दिया !!

और उनको जो इस तरह के बयान आते थे तो चीन को लगा कि ये तो बहुत मूर्ख आदमी है ! कहता है सेना को हटा लो ! सेना का खर्चा कम कर दो ! गोला बारूद बनाना बंद कर दो ! और खुद दुनिया भर मे घूमता रहता है ! कभी सेना के लोगो के पास न जाना ! सेना के साथ को meeting न करना ! इस तरह के काम करते रहते थे !

तो चीन को मौका मिल गया ! और चीन एक मौका ये भी मिल गया !चीन को लगा की vk kirashan तो प्रधानमंत्री (नेहरू ) के आदमी है !! तो शायद नेहरू की भी यही मान्यता होगी ! क्यूंकि vk krishan नेहरू का खास दोस्त था तो नेहरू ने उसको रक्षा मंत्री बना दिया था ! वरना vk krishan कोई बड़ा नेता नहीं था देशा का ! जनता मे कोई उनका प्रभाव नहीं था ! बस नेहरू की दोस्ती ने उनको रक्षा मंत्री बना दिया !!

और वो हमेशा जो भाषण देते थे !लंबा भाषण देते थे 3 घंटे 4 घंटे ! लेकिन आप उनके भाषण का सिर पैर नहीं निकाल सकते थे कि उन्होने बोला क्या ! ऐसे मूर्ख व्यक्ति थे vk krishan menon !

तो ये सब मूर्खता देख कर चीन ने भारत पर हमला किया और भारत का एक इलाका था aksai chin !
वहाँ चीन ने पूरी ताकत से हमला किया ! और हालात क्या थे आप जानते है ! सेना को वापिस बुला लिया था पहले ही !! सेना का बजट कम था ! गोला बारूद के कारखाने बंद थे !! तो चीनी सैनिको ने बहुत मनमानी कि उस askai chin के क्षेत्र मे !!

और जो सबसे बुरा काम किया ! चीनी सैनिको ने सैंकड़ों महिलाओ के साथ जमकर बलत्कार किए !! वहाँ हजारो युवको कि ह्त्या करी ! askai chin का जो इलाका है वहाँ सुविधाए कुछ ऐसे है कि लोग वैसे ही अपना जीवन मुश्किल से जी पाते है ! रोज का जीवन चलाना ही उनको लिए किसी युद्ध से कम नहीं होता ऊपर से चीन का हमला !!

तो वहाँ के लोगो ने उस समय बहुत बहुत दुख झेला ! और वहाँ हमारी सेना नहीं थी ! तो वहाँ लोगो के मन हमारी सरकार के विरुद्ध एक विद्रोह की भावना उतपन हुई ! और वो आज भी झलकती है ! आज भी आप वहाँ जाये तो वहाँ लोग ये सवाल करते है कि जब चीन ने हमला किया था तो आपकी सेना कहाँ थी ! और सच है हम लोगो के पास इसका कोई जवाब नहीं ! तो उनमे एक अलगाव कि भावना उतपन हुई जो अलग क्षेत्र की मांग करने लगे !!!

तो हमले मे चीन ने हमारी 72 हजार वर्ग मील जमीन पर कब्जा कर लिया ! और हमारा तीर्थ स्थान कैलाश मानसरोवर भी चीन के कब्जे मे चला गया ! और बहुत शर्म कि बात है आज हमे अपने तीर्थ स्थान पर जाने के लिए चीन से आज्ञा लेनी पड़ती है ! और इसके जिम्मेदार सिर्फ और सिर्फ नेहरू और vk krishan menon जैसे घटिया और मूर्ख किसम के नेता थे !!!
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तो युद्ध के बाद एक बार संसद मे भारत-चीन युद्ध पर चर्चा हुई ! सभी सांसदो के मुह से जो एक स्वर सुनाई दे रहा था ! वो यही था !कि किसी भी तरह चीन के पास गई 72 हजार वर्ग मील जमीन और हमारा तीर्थ स्थान कैलाश मानसरोवर वापिस आना चाहिए !

महावीर त्यागी जी जो उस समय के बहुत महान नेता थे !उन्होने ने सीधा नेहरू को कहा कि आप ही थे जिनहोने सेना हटाई ! सेना का बजट कम किया ! गोला बारूद बनाने के कारखाने बंद करवाये! आप ही के लोग विदेशो मे घूमा करते थे ! और आपकी इन गलितयो ने चीन को मौका मिला और उसमे हमला किया और हमारी 72 हजार वर्ग मील जमीन पर कब्जा कर लिया !!

अब आप ही बताए कि आप ये 72 हजार वर्ग मील जमीन को कब वापिस ला रहे है ?????!

तो इस हरामखोर नेहरू का जवाब सुनिए ! नेहरू ने कहा फिर क्या हुआ अगर वो जमीन चली गई ! चली गई तो चली गई ! वैसे भी बंजर जमीन थी घास का टुकड़ा नहीं उगता था ! ऐसी जमीन के लिए क्या चिंता करना !!

तो त्यागी जी ने बहुत ही बढ़िया जवाब दिया ! त्यागी जी ने कहा नेहरू जी उगता तो आपके सिर पर भी कुछ नहीं ! तो इसको भी काट कर चीन को देदो ! और इत्फ़ाक से नेहरू उस समय पूरी तरह गंजा हो चुका था !!

तो दोस्तो इस नेहरू ने धरती माँ को एक जमीन का टुकड़ा मान लिया ! और अपनी गलती मानने के बजाय ! उल्टा ब्यान दे रहा है जमीन चली गई तो चली गई !

इससे ज्यादा घटिया बात कुछ और नहीं हो सकती ! !

और लानत है भारत की जनता पर आज चीन युद्ध के 50 साल बाद भी नेहरू परिवार के वंशज देश चला रहे हैं !! हमे दिन रात लूट रहे हैं !हमे मूर्ख बना रेह हैं !
____________

आपने पूरी post पढ़ी बहुत बहुत धन्यवाद !
अमर शहीद राजीव दीक्षित जी की जय !!

1962 का युद्ध सारी घटना यहाँ देखे !!
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COW SLAUGHTER-INDIA IS NUMBER ONE IN WORLD NOW?????

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विमान का अंतरतारकीय माध्यम के निर्माण करने की बिधि

 विमान का अंतरतारकीय माध्यम के निर्माण करने की बिधि
Photo: आर्यावर्त भरतखण्ड संस्कृति

एक और बड़ी खबर ......

विज्ञान प्रसार (वि.प्र.) विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विभाग, भारत सरकार की रिपोर्ट

New Evidence of Ancient Indian Science Of Space Travel Source:

Conspiracy Journal#205 April 11, 2003

कुछ सालों पहले चीन पुरातत्त्व सरकार ने ल्हासा तथा तिब्बत में संस्कृत दस्तावेजों की खोज की है और उन्हें अनुवाद करने के लिए University of Chandigarh भेजा गया है।

इस विश्वविध्यालय की Dr. Ruth Reyna ने बताया कि इन दस्तावेजों में विमान का अंतरतारकीय माध्यम के निर्माण करने की बिधि दी है।

अंतरखगोलीय माध्यम या अंतरतारकीय माध्यम हाइड्रोजन और हिलीयम के कणों का मिश्रण होता है जो अत्यंत कम घनत्व की स्थिती मे सारे ब्रह्मांड मे फैला हुआ रहता है।

अंग्रेज़ी में "अंतरतारकीय" को "इन्टरस्टॅलर" (interstellar) और "अंतरतारकीय माध्यम" को "इन्टरस्टॅलर मीडयम" (interstellar medium) कहते हैं।

उन्होंने आगे बताया विमान को संचालित करने के लिए गुरुत्वाकर्षण विरोधी (anti-gravitational) शक्ति की आवश्यकता होती है और anti-gravitational की प्रणाली "laghima" शक्ति प्रणाली अनुरूप होती है।

"laghima" की संस्कृत में सिद्धि कहते है और इंग्लिश में levitation कहा जाता है। levitation की शक्ति को आप इस विडियो में देख सकते हैं जो की anti-gravitational होती है।

यही अंतरतारकीय माध्यम (interstellar medium) विमान के अन्दर levitation power को activate करता है और विमान ऊपर की ओर उठता है।

http://www.youtube.com/watch?v=SnLj8DMqaC8

http://www.youtube.com/watch?feature=player_embedded&v=tW6pVFOpE6Q#!

http://www.virtualsynapses.com/2010/09/power-of-levitation-laghima.html#.URjNix04uIA

जैसा की हम अपने ग्रंथो में देखते हैं कि भगवन, ऋषि तथा कई देवता वायु मार्ग द्वारा आते थे। ये वही anti-gravitational वाली levitation शक्ति का प्रयोग करते थे।

इसी levitation शक्ति (विमानों के लिए) का वर्णन और प्रणाली, चीन को उन दस्तावोजों में मिली है। जिसका अनुवाद किया जा रहा है।

levitation power कोई तंत्र विद्या द्वारा नहीं की जाती है। यह एक ब्रह्मांडीय शक्ति है। जिसको करने के लिए तप और कई नियमों का पालन करना पड़ता है।

http://www.vigyanprasar.gov.in/comcom/vimana.htm


।। जयतु संस्‍कृतम् । जयतु भारतम् ।।

आर्यावर्त भरतखण्ड संस्कृति
आर्यावर्त भरतखण्ड संस्कृति
 विज्ञान प्रसार (वि.प्र.) विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विभाग, भारत सरकार की रिपोर्ट

New Evidence of Ancient Indian Science Of Space Travel Source:

Conspiracy Journal#205 April 11, 2003...

कुछ सालों पहले चीन पुरातत्त्व सरकार ने ल्हासा तथा तिब्बत में संस्कृत दस्तावेजों की खोज की है और उन्हें अनुवाद करने के लिए University of Chandigarh भेजा गया है।

इस विश्वविध्यालय की Dr. Ruth Reyna ने बताया कि इन दस्तावेजों में विमान का अंतरतारकीय माध्यम के निर्माण करने की बिधि दी है।

अंतरखगोलीय माध्यम या अंतरतारकीय माध्यम हाइड्रोजन और हिलीयम के कणों का मिश्रण होता है जो अत्यंत कम घनत्व की स्थिती मे सारे ब्रह्मांड मे फैला हुआ रहता है।

अंग्रेज़ी में "अंतरतारकीय" को "इन्टरस्टॅलर" (interstellar) और "अंतरतारकीय माध्यम" को "इन्टरस्टॅलर मीडयम" (interstellar medium) कहते हैं।

उन्होंने आगे बताया विमान को संचालित करने के लिए गुरुत्वाकर्षण विरोधी (anti-gravitational) शक्ति की आवश्यकता होती है और anti-gravitational की प्रणाली "laghima" शक्ति प्रणाली अनुरूप होती है।

"laghima" की संस्कृत में सिद्धि कहते है और इंग्लिश में levitation कहा जाता है। levitation की शक्ति को आप इस विडियो में देख सकते हैं जो की anti-gravitational होती है।

यही अंतरतारकीय माध्यम (interstellar medium) विमान के अन्दर levitation power को activate करता है और विमान ऊपर की ओर उठता है।

http://www.youtube.com/watch?v=SnLj8DMqaC8

http://www.youtube.com/watch?feature=player_embedded&v=tW6pVFOpE6Q#!

http://www.virtualsynapses.com/2010/09/power-of-levitation-laghima.html#.URjNix04uIA

जैसा की हम अपने ग्रंथो में देखते हैं कि भगवन, ऋषि तथा कई देवता वायु मार्ग द्वारा आते थे। ये वही anti-gravitational वाली levitation शक्ति का प्रयोग करते थे।

इसी levitation शक्ति (विमानों के लिए) का वर्णन और प्रणाली, चीन को उन दस्तावोजों में मिली है। जिसका अनुवाद किया जा रहा है।

levitation power कोई तंत्र विद्या द्वारा नहीं की जाती है। यह एक ब्रह्मांडीय शक्ति है। जिसको करने के लिए तप और कई नियमों का पालन करना पड़ता है।

http://www.vigyanprasar.gov.in/comcom/vimana.htm


।। जयतु संस्‍कृतम् । जयतु भारतम् ।।
 

बौधायन का एक सूत्र NOT OF पायथागोरस


बौधायन की पायथागोरस प्रमेय ! ------
______________________________________________________

ग्रीक गणितज्ञ पायथागोरस (जन्म 570 ईसा पूर्व) की पायथागोरस प्रमेय को कोन नहीं जनता |
जबकि यह कम लोग ही जानते होंगे कि वास्तव में‌ इसके रचयिता पायथागोरस नहीं वरन हमारे वैदिक ऋषि बौधायन (जन्म 800 ईसा पूर्व.) हैं, जिऩ्होंने यह रचना पायथागोरस से लगभग 250 वर्ष पहले की थी। ऐसा भी‌ नहीं है कि पायथागोरस ने इसकी रचना स्वतंत्र रूप से की हो अपितु शुल्ब सूत्र के अध्य...न से ही प्राप्त की थी।

इस प्रमेय का वर्णन शुल्ब सूत्र (अध्याय १, श्लोक १२) में मिलता है।
शुल्बसूत्र, स्रौत सूत्रों के भाग हैं ; स्रौतसूत्र, यह वेदों के उपांग (appendices) हैं। शुल्बसूत्र ही भारतीय गणित के सम्बन्ध में जानकारी देने वाले प्राचीनतम स्रोत हैं।
शुल्ब सूत्र में यज्ञ करने के लिये जो भी साधन आदि चाहिये उनके निर्माण या गुणों का वर्णन है। यज्ञार्थ वेदियों के निर्माण का परिशुद्ध होना अनिवार्य था। अत: उनका समुचित वर्णन शुल्ब सूत्रों में‌ दिया गया है। भिन्न आकारों की वेदी‌ बनाते समय ऋषि लोग मानक सूत्रों (रस्सी) का उपयोग करते थे । ऐसी प्रक्रिया में रेखागणित तथा बीजगणित का आविष्कार हुआ।
शुल्बसूत्र का एक खण्ड बौधायन शुल्ब सूत्र है। बौधायन शुल्ब सूत्र में ऋषि बौधायन ने गणित ज्यामिति
सम्बन्धी कई सूत्र दिए |


बौधायन का एक सूत्र इस प्रकार है:

Photo: आर्यावर्त भरतखण्ड संस्कृति

बौधायन की पायथागोरस प्रमेय ! ------
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ग्रीक गणितज्ञ पायथागोरस (जन्म 570 ईसा पूर्व) की पायथागोरस प्रमेय को कोन  नहीं जनता |
जबकि यह कम लोग ही  जानते होंगे कि वास्तव में‌ इसके रचयिता पायथागोरस नहीं वरन हमारे वैदिक ऋषि बौधायन (जन्म 800 ईसा पूर्व.)  हैं, जिऩ्होंने यह रचना पायथागोरस  से लगभग 250 वर्ष पहले की थी। ऐसा भी‌ नहीं है कि पायथागोरस ने इसकी रचना स्वतंत्र रूप से की हो अपितु शुल्ब सूत्र के अध्यन से ही प्राप्त की थी।

इस प्रमेय का वर्णन शुल्ब सूत्र (अध्याय १, श्लोक १२) में मिलता है।
शुल्बसूत्र, स्रौत सूत्रों के भाग हैं ; स्रौतसूत्र, यह वेदों के उपांग (appendices) हैं। शुल्बसूत्र ही भारतीय गणित के सम्बन्ध में जानकारी देने वाले प्राचीनतम स्रोत हैं।
शुल्ब सूत्र में यज्ञ करने के लिये जो भी साधन आदि चाहिये उनके निर्माण या गुणों का वर्णन है। यज्ञार्थ वेदियों के निर्माण का परिशुद्ध  होना अनिवार्य था। अत: उनका समुचित वर्णन शुल्ब सूत्रों में‌ दिया गया है।   भिन्न आकारों की वेदी‌ बनाते समय ऋषि लोग मानक सूत्रों (रस्सी) का  उपयोग करते थे । ऐसी प्रक्रिया में रेखागणित तथा बीजगणित का आविष्कार हुआ।
शुल्बसूत्र का एक खण्ड बौधायन शुल्ब सूत्र है। बौधायन शुल्ब सूत्र में ऋषि बौधायन ने गणित ज्यामिति
सम्बन्धी कई सूत्र दिए |


बौधायन का एक सूत्र इस प्रकार है:
दीर्घचतुरश्रस्याक्ष्णया रज्जु: पार्श्वमानी तिर्यंगमानी च यत्पृथग्भूते कुरुतस्तदुभयं करोति।
 (बो। सू० १-४८)

एक आयत का विकर्ण उतना ही क्षेत्र इकट्ठा बनाता है जितने कि उसकी लम्बाई और चौड़ाई अलग-अलग बनाती हैं।
 अर्थात
किसी आयत के विकर्ण द्वारा व्युत्पन्न क्षेत्रफल उसकी लम्बाई एवं चौड़ाई द्वारा पृथक-पृथक व्युत्पन्न क्षेत्र फलों के योग के बराबर होता है।
 यहीं तो पाइथेगोरस का प्रमेय है। स्पष्ट है कि इस प्रमेय की जानकारी भारतीय गणितज्ञों को पाइथेगोरस के पहले से थी।

 जो प्रमेय पायथागोरस ने दी वो है :
The sum of the areas of the two squares on the legs (a and b)
equals the area of the square on the hypotenuse (c).

a2 + b2 = c2

ज्यामितिक साहित्य मूलतः ऋग्वेद से उत्पन्न हुआ है जिसके अनुसार अग्नि के तीन स्थान होते हैं- वृत्ताकार वेदी में गार्हपत्य, वर्गाकार में अंह्यान्या तथा अर्धवृत्ताकार में दक्षिणाग्नि। तीनों वेदियों में से प्रत्येक का क्षेत्रफल समान होता है। अतः वृत्त वर्ग एवं कर्णी वर्ग का ज्ञान भारत में ऋग्वेद काल में था। इन वेदियों के निर्माण के लिए भिन्न-भिन्न ज्यामितीय क्रियाओं का प्रयोग किया जाता था। जैसे किसी सरल रेखा पर वर्ग का निर्माण, वर्ग के कोणों एवं भुजाओं का स्पर्च्च करते हुए वृत्तों का निर्माण, वृत्त का दो गुणा करना। इस हेतु इनका मान ज्ञात होना जरूरी था।

इनके अतिरिक्त उऩ्होंने २ के वर्गमूल निकालने का सूत्र भी दिया है, जिससे उसका मान दशमलव के पाँच स्थान तक सही आता है तथा कई अन्य ज्यामितीय रचनाओं के क्षेत्रफल ज्ञात करने, ज्यामितीय आकारों के बारे तथा एक ज्यामितीय आकार को दूसरे समक्षेत्रीय आकार में परिवर्तित करना आदि |
उदाहरण के लिए एक आयत को एक समक्षेत्रीय वर्ग के रूप में अथवा उसके अंश या गुणित (Multiple) में प्राप्त करने का तरीका।

और भी बहुत कुछ:
http://hi.wikipedia.org/wiki/भारतीय_गणित


卐 !! ॐआर्यावर्त भरतखण्ड संस्कृतिॐ !! 卐

卐 !! ॐआर्यावर्त भरतखण्ड संस्कृतिॐ !! 卐
 दीर्घचतुरश्रस्याक्ष्णया रज्जु: पार्श्वमानी तिर्यंगमानी च यत्पृथग्भूते कुरुतस्तदुभयं करोति।
(बो। सू० १-४८)

एक आयत का विकर्ण उतना ही क्षेत्र इकट्ठा बनाता है जितने कि उसकी लम्बाई और चौड़ाई अलग-अलग बनाती हैं।
अर्थात
किसी आयत के विकर्ण द्वारा व्युत्पन्न क्षेत्रफल उसकी लम्बाई एवं चौड़ाई द्वारा पृथक-पृथक व्युत्पन्न क्षेत्र फलों के योग के बराबर होता है।
यहीं तो पाइथेगोरस का प्रमेय है। स्पष्ट है कि इस प्रमेय की जानकारी भारतीय गणितज्ञों को पाइथेगोरस के पहले से थी।

जो प्रमेय पायथागोरस ने दी वो है :
The sum of the areas of the two squares on the legs (a and b)
equals the area of the square on the hypotenuse (c).

a2 + b2 = c2

ज्यामितिक साहित्य मूलतः ऋग्वेद से उत्पन्न हुआ है जिसके अनुसार अग्नि के तीन स्थान होते हैं- वृत्ताकार वेदी में गार्हपत्य, वर्गाकार में अंह्यान्या तथा अर्धवृत्ताकार में दक्षिणाग्नि। तीनों वेदियों में से प्रत्येक का क्षेत्रफल समान होता है। अतः वृत्त वर्ग एवं कर्णी वर्ग का ज्ञान भारत में ऋग्वेद काल में था। इन वेदियों के निर्माण के लिए भिन्न-भिन्न ज्यामितीय क्रियाओं का प्रयोग किया जाता था। जैसे किसी सरल रेखा पर वर्ग का निर्माण, वर्ग के कोणों एवं भुजाओं का स्पर्च्च करते हुए वृत्तों का निर्माण, वृत्त का दो गुणा करना। इस हेतु इनका मान ज्ञात होना जरूरी था।

इनके अतिरिक्त उऩ्होंने २ के वर्गमूल निकालने का सूत्र भी दिया है, जिससे उसका मान दशमलव के पाँच स्थान तक सही आता है तथा कई अन्य ज्यामितीय रचनाओं के क्षेत्रफल ज्ञात करने, ज्यामितीय आकारों के बारे तथा एक ज्यामितीय आकार को दूसरे समक्षेत्रीय आकार में परिवर्तित करना आदि |
उदाहरण के लिए एक आयत को एक समक्षेत्रीय वर्ग के रूप में अथवा उसके अंश या गुणित (Multiple) में प्राप्त करने का तरीका।

और भी बहुत कुछ:
http://hi.wikipedia.org/wiki/भारतीय_गणित
 

KIDNEY STONE

किसी कारण पूरी post नहीं पढ़ सकते तो यहाँ click कर देखे !
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सबसे पहले कुछ परहेज !
 Photo: किसी कारण पूरी post नहीं पढ़ सकते तो यहाँ click कर देखे !
http://www.youtube.com/watch?v=pWfljrsaBGM
सबसे पहले कुछ परहेज !

मित्रो जिसको भी शरीर मे पथरी है वो चुना कभी ना खाएं ! (काफी लोग पान मे डाल कर खा जाते हैं )
क्योंकि पथरी होने का मुख्य कारण आपके शरीर मे अधिक मात्रा मे कैलशियम का होना है | मतलब जिनके शरीर मे पथरी हुई है उनके शरीर मे जरुरत से अधिक मात्रा मे कैलशियम है लेकिन वो शरीर मे पच नहीं रहा है वो अलग बात हे| इसलिए आप चुना खाना बंद कर दीजिए|

आयुर्वेदिक इलाज !
______________
पखानबेद नाम का एक पौधा होता है ! उसे पथरचट भी कुछ लोग बोलते है ! उसके पत्तों को पानी मे उबाल कर काढ़ा बना ले ! मात्र 7 से 15 दिन मे पूरी पथरी खत्म !! और कई बार तो इससे भी जल्दी खत्म हो जाती !!!

होमियोपेथी मे एक दवा है ! वो आपको किसी भी होमियोपेथी के दुकान पर मिलेगी उसका नाम हे BERBERIS VULGARIS ये दवा के आगे लिखना है MOTHER TINCHER ! ये उसकी पोटेंसी हे|
वो दुकान वाला समझ जायेगा| यह दवा होमियोपेथी की दुकान से ले आइये|

(ये BERBERIS VULGARIS दवा भी पथरचट नाम के पोधे से बनी है बस फर्क इतना है ये dilutions form मे हैं पथरचट पोधे का botanical name BERBERIS VULGARIS ही है )

अब इस दवा की 10-15 बूंदों को एक चौथाई (1/ 4) कप गुण गुने पानी मे मिलाकर दिन मे चार बार (सुबह,दोपहर,शाम और रात) लेना है | चार बार अधिक से अधिक और कमसे कम तीन बार|इसको लगातार एक से डेढ़ महीने तक लेना है कभी कभी दो महीने भी लग जाते है |

इससे जीतने भी stone है ,कही भी हो गोलब्लेडर gall bladder )मे हो या फिर किडनी मे हो,या युनिद्रा के आसपास हो,या फिर मुत्रपिंड मे हो| वो सभी स्टोन को पिगलाकर ये निकाल देता हे|

99% केस मे डेढ़ से दो महीने मे ही सब टूट कर निकाल देता हे कभी कभी हो सकता हे तीन महीने भी हो सकता हे लेना पड़े|तो आप दो महिने बाद सोनोग्राफी करवा लीजिए आपको पता चल जायेगा कितना टूट गया है कितना रह गया है | अगर रह गया हहै तो थोड़े दिन और ले लीजिए|यह दवा का साइड इफेक्ट नहीं है |

____________________
ये तो हुआ जब stone टूट के निकल गया अब दोबारा भविष्य मे यह ना बने उसके लिए क्या??? क्योंकि कई लोगो को बार बार पथरी होती है |एक बार stone टूट के निकल गया अब कभी दोबारा नहीं आना चाहिए इसके लिए क्या ???

इसके लिए एक और होमियोपेथी मे दवा है CHINA 1000|
प्रवाही स्वरुप की इस दवा के एक ही दिन सुबह-दोपहर-शाम मे दो-दो बूंद सीधे जीभ पर डाल दीजिए|सिर्फ एक ही दिन मे तीन बार ले लीजिए फिर भविष्य मे कभी भी स्टोन नहीं बनेगा|
मित्रो जिसको भी शरीर मे पथरी है वो चुना कभी ना खाएं ! (काफी लोग पान मे डाल कर खा जाते हैं )
क्योंकि पथरी होने का मुख्य कारण आपके शरीर मे अधिक मात्रा मे कैलशियम का होना है | मतलब जिनके शरीर मे पथरी हुई है उनके शरीर मे जरुरत से अधिक मात्रा मे कैलशियम है लेकिन वो शरीर मे पच नहीं रहा है वो अलग बात हे| इसलिए आप चुना खाना बंद कर दीजिए|

आयुर्वेदिक इलाज !
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पखानबेद नाम का एक पौधा होता है ! उसे पथरचट भी कुछ लोग बोलते है ! उसके पत्तों को पानी मे उबाल कर काढ़ा बना ले ! मात्र 7 से 15 दिन मे पूरी पथरी खत्म !! और कई बार तो इससे भी जल्दी खत्म हो जाती !!!

होमियोपेथी मे एक दवा है ! वो आपको किसी भी होमियोपेथी के दुकान पर मिलेगी उसका नाम हे BERBERIS VULGARIS ये दवा के आगे लिखना है MOTHER TINCHER ! ये उसकी पोटेंसी हे|
वो दुकान वाला समझ जायेगा| यह दवा होमियोपेथी की दुकान से ले आइये|

(ये BERBERIS VULGARIS दवा भी पथरचट नाम के पोधे से बनी है बस फर्क इतना है ये dilutions form मे हैं पथरचट पोधे का botanical name BERBERIS VULGARIS ही है )

अब इस दवा की 10-15 बूंदों को एक चौथाई (1/ 4) कप गुण गुने पानी मे मिलाकर दिन मे चार बार (सुबह,दोपहर,शाम और रात) लेना है | चार बार अधिक से अधिक और कमसे कम तीन बार|इसको लगातार एक से डेढ़ महीने तक लेना है कभी कभी दो महीने भी लग जाते है |

इससे जीतने भी stone है ,कही भी हो गोलब्लेडर gall bladder )मे हो या फिर किडनी मे हो,या युनिद्रा के आसपास हो,या फिर मुत्रपिंड मे हो| वो सभी स्टोन को पिगलाकर ये निकाल देता हे|

99% केस मे डेढ़ से दो महीने मे ही सब टूट कर निकाल देता हे कभी कभी हो सकता हे तीन महीने भी हो सकता हे लेना पड़े|तो आप दो महिने बाद सोनोग्राफी करवा लीजिए आपको पता चल जायेगा कितना टूट गया है कितना रह गया है | अगर रह गया हहै तो थोड़े दिन और ले लीजिए|यह दवा का साइड इफेक्ट नहीं है |

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ये तो हुआ जब stone टूट के निकल गया अब दोबारा भविष्य मे यह ना बने उसके लिए क्या??? क्योंकि कई लोगो को बार बार पथरी होती है |एक बार stone टूट के निकल गया अब कभी दोबारा नहीं आना चाहिए इसके लिए क्या ???

इसके लिए एक और होमियोपेथी मे दवा है CHINA 1000|
प्रवाही स्वरुप की इस दवा के एक ही दिन सुबह-दोपहर-शाम मे दो-दो बूंद सीधे जीभ पर डाल दीजिए|सिर्फ एक ही दिन मे तीन बार ले लीजिए फिर भविष्य मे कभी भी स्टोन नहीं बने
 

वेदेशी कंपनी nestle का पर्दाफाश ........ उत्पादो मे घोड़ों का मांस .....

वेदेशी कंपनी nestle का पर्दाफाश ........ उत्पादो मे घोड़ों का मांस .....

लंदन।स्विट्जरलैंड की कंपनी नेस्ले के खाद्य पदार्थों के डीएनए परीक्षण में घोड़े का मांस पाया गया है...
http://www.samaylive.com/international-news-in-hindi/194969/nestle-pulls-meals-in-italy-spain-as-horsemeat-scandal-grows.html

लंदन। डिब्बाबंद खाद्य उत्पाद बनाने वाली दुनिया की सबसे बड़ी कंपनी नेस्ले आजकल विवादों में है। कंपनी के बीफ प्रॉडक्ट्स में घोड़े का मांस पाया गया है। मिलाव...ट की इस खबर के बाद नेस्ले ने इटली और स्पेन के बाजारों से अपने कुछ प्रॉडक्ट्स वापस ले लिए हैं।
http://navbharattimes.indiatimes.com/world/europe/Food-giant-Nestle-recalls-products-after-horse-meat-discovery/articleshow/18570231.cms

लंदन। खाद्य उत्पाद बनाने वाली दुनिया की सबसे बड़ी कंपनी नेस्ले के उत्पादों में भी घोड़े का मांस मिलने की पुष्टि हुई है
http://www.jagran.com/news/world-nestle-finds-horsemeat-in-beef-pasta-meals-10146023.html
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300 लाख करोड़ रु काला धन

300 लाख करोड़ रु काला धन
Photo: 300 लाख करोड़ रु काला धन
► स्विस बैंक में भारत के बेइमान व भ्रष्ट लोग जो नाममात्र के है उनका 300 लाख करोड़ रूपये का काला धन जमा है|
► यदि 300 लाख करोड़ रूपये का काला धन भारत आ जाये तो भारत के 626 जिलों के विकास के लिए एक जिले को 50,000 करोड़ रुपये मिलेंगे|
► यदि यह पैसा (300 लाख करोड़ रुपये) भारत आ जाये एवं एक जिले में 500 गाँव है तो एक गाँव को विकास के लिए 100 करोड़ रुपये मिलेंगे| सोचिए एक गाँव का 100 करोड़ में कितना विकास हो सकता है|
► यह 300 लाख करोड़ रुपये भारत आ सकते है यदि देश की संसद कानून बनाकर राष्ट्र की संपति घोषित कर देवे| चूंकि काला धन अवैध रुप से कमाया गया है इस कारण उसे राष्ट्र की संपति घोषित कर जप्त की जा सकती है|
► अमेरिका ने स्विस बैंक में जमा अपने देश का काला धन वापस मँगवा लिया है| अमेरिका की बैंक लगातार दिवालिया हो रही थी तथा अर्थव्यवस्था उक्त काला धन वापस मँगवा कर ठीक किया है| बराक ओबामा के चुनावी मुद्दे में यह काला धन वापस लाने का भी मुद्दा था जो उन्होने पूरा किया|
► काले धन की जानकारी ट्रैन्सपेरन्सी इन्टरनेशनल टैक्स जस्टिस नेटवर्क आदि से प्राप्त हुई है| यह भी जानकारी प्राप्त हुई है कि स्विस बैंक में सबसे ज्यादा काला धन भारतीय भ्रष्ट लोगो का जमा है|
► स्विस बैंक के डायरेक्टर ने भी स्वीकार किया है कि भारतीयों का सबसे ज्यादा पैसा जमा है|
► 300 लाख करोड़ इक बार लिखकर तो देखें 300,00,0000,0000000/- एक आदमी के हिस्से 25 लाख रुपये|
► 300 लाख करोड़ रुपये का काला धन 100/- 200/- की रिश्वत की राशि से नहीं लूटी गई है| यह लूट प्राकृतिक संसाधन,बडी खरीदी आदि से लूट कर स्विस बैंक में जमा कराई गई है| जिसका एक उदाहरण 172000 करोड़ रुपये का “ स्पेक्ट्रम घोटाला” है|

 ► स्विस बैंक में भारत के बेइमान व भ्रष्ट लोग जो नाममात्र के है उनका 300 लाख करोड़ रूपये का काला धन जमा है|
► यदि 300 लाख करोड़ रूपये का काला धन भारत आ जाये तो भारत के 626 जिलों के विकास के लिए एक जिले को 50,000 करोड़ रुपये मिलेंगे|
► यदि यह पैसा (300 लाख करोड़ रुपये) भारत आ जाये एवं एक जिले में 500 गाँव है तो एक गाँव को विकास के लिए 100 करोड़ रुपये मिलेंगे| सोचिए एक गाँव का 100 करोड़ में कितना विकास हो सकता है|
► यह 300 लाख करोड़ रुपये भारत आ सकते है ...यदि देश की संसद कानून बनाकर राष्ट्र की संपति घोषित कर देवे| चूंकि काला धन अवैध रुप से कमाया गया है इस कारण उसे राष्ट्र की संपति घोषित कर जप्त की जा सकती है|
► अमेरिका ने स्विस बैंक में जमा अपने देश का काला धन वापस मँगवा लिया है| अमेरिका की बैंक लगातार दिवालिया हो रही थी तथा अर्थव्यवस्था उक्त काला धन वापस मँगवा कर ठीक किया है| बराक ओबामा के चुनावी मुद्दे में यह काला धन वापस लाने का भी मुद्दा था जो उन्होने पूरा किया|
► काले धन की जानकारी ट्रैन्सपेरन्सी इन्टरनेशनल टैक्स जस्टिस नेटवर्क आदि से प्राप्त हुई है| यह भी जानकारी प्राप्त हुई है कि स्विस बैंक में सबसे ज्यादा काला धन भारतीय भ्रष्ट लोगो का जमा है|
► स्विस बैंक के डायरेक्टर ने भी स्वीकार किया है कि भारतीयों का सबसे ज्यादा पैसा जमा है|
► 300 लाख करोड़ इक बार लिखकर तो देखें 300,00,0000,0000000/- एक आदमी के हिस्से 25 लाख रुपये|
► 300 लाख करोड़ रुपये का काला धन 100/- 200/- की रिश्वत की राशि से नहीं लूटी गई है| यह लूट प्राकृतिक संसाधन,बडी खरीदी आदि से लूट कर स्विस बैंक में जमा कराई गई है| जिसका एक उदाहरण 172000 करोड़ रुपये का “ स्पेक्ट्रम घोटाला” है

WARNING! MORE THAN 40 Foods never eat -coming from China

 1-Corn- corn from China. Some producers add sodium cyclamate to their corn. The purpose of this additive is to preserve the yellow color of...