Tuesday, January 29, 2019

खांसी और कफ हो दूर करेंगे यह रामबाण घरेलु उपचार

कैसी भी खांसी और कफ हो दूर करेंगे यह रामबाण घरेलु उपचार
कारण :
खांसी(cough) होने के अनेक कारण हैं- खांसी वात, पित्त और कफ बिगड़ने के कारण होती है।
• घी-तेल से बने खाद्य पदार्थों के सेवन के तुरन्त बाद पानी पी लेने से खांसी की उत्पत्ति होती है। छोटे बच्चे स्कूल के आस-पास मिलने वाले चूरन, चाट-चटनी व खट्टी-मीठी दूषित चीजें खाते हैं जिससे खांसी रोग हो जाता है।
• मूंगफली, अखरोट, बादाम, चिलगोजे व पिस्ता आदि खाने के तुरन्त बाद पानी पीने से खांसी होती है। ठंड़े मौसम में ठंड़ी वायु के प्रकोप व ठंड़ी वस्तुओं के सेवन से खांसी उत्पन्न होती है। क्षय रोग व सांस के रोग (अस्थमा) में भी खांसी उत्पन्न होती है।
• सर्दी के मौसम में कोल्ड ड्रिंक पीने से खांसी होती है। ठंड़े वातावरण में अधिक घूमने-फिरने, फर्श पर नंगे पांव चलने, बारिश में भीग जाने, गीले कपड़े पहनने आदि कारणों से सर्दी-जुकाम के साथ खांसी उत्पन्न होती है।
• क्षय रोग में रोगी को देर तक खांसने के बाद थोड़ा सा बलगम निकलने पर आराम मिलता है। आंत्रिक ज्वर (टायफाइड), खसरा, इंफ्लुएंजा, निमोनिया, ब्रोंकाइटिस (श्वासनली की सूजन), फुफ्फुसावरण शोथ (प्लूरिसी) आदि रोगों में भी खांसी उत्पन्न होती है।
• ‎भोजन और परहेज :
खांसी(khansi) में पसीना आना अच्छा होता है। नियम से एक ही बार भोजन करना, जौ की रोटी, गेहूं की रोटी, शालि चावल, पुराने चावल का भात, मूंग और कुल्थी की दाल, बिना छिल्के की उड़द की दाल, परवल, तरोई, टिण्डा बैंगन, सहजना, बथुआ, नरम मूली, केला, खरबूजा, गाय या बकरी का दूध, प्याज, लहसुन, बिजौरा, पुराना घी, मलाई, कैथ की चटनी, शहद, धान की खील, कालानमक, सफेद जीरा, कालीमिर्च, अदरक, छोटी इलायची, गर्म करके खूब ठंड़ा किया हुआ साफ पानी, आदि खांसी के रोगियों के लिए लाभकारी है।
खांसी में नस्य , आग के सामने रहना, धुएं में रहना, धूप में चलना, मैथुन करना, दस्त रोग, कब्ज, सीने में जलन पैदा करने वाली वस्तुओं का सेवन करना, बाजरा, चना आदि रूखे अन्न खाना, विरुद्ध भोजन करना, मछली खाना, मल मूत्र आदि के वेग को रोकना, रात को जागना, व्यायाम करना, अधिक परिश्रम, फल या घी खाकर पानी पीना तथा अरबी, आलू, लालमिर्च, कन्द, सरसो, पोई, टमाटर, मूली, गाजर, पालक, शलजम, लौकी, गोभी का साग आदि का सेवन करना हानिकारक होता है।
सावधानी
खांसी के रोगी को प्रतिदिन भोजन करने के एक घंटे बाद पानी पीने की आदत डालनी चाहिए। इससे खांसी से बचाव के साथ पाचनशक्ति मजबूत होती है। खांसी का वेग नहीं रोकना चाहिए क्योंकि इससे विभिन्न रोग हो सकते हैं- दमा का रोग, हृदय रोग, हिचकी, अरुचि, नेत्र रोग आदि
विभिन्न औषधियों से उपचार : cough khansi ke gharelu upay
१-हल्दी :
• खांसी से पीड़ित रोगी को गले व सीने में घबराहट हो तो गर्म पानी में हल्दी और नमक मिलाकर पीना चाहिए। हल्दी का छोटा सा टुकड़ा मुंह में डालकर चूसते रहने से खांसी में आराम मिलता है।
• हल्दी को कूटकर तवे पर भून लें और इसमें से आधा चम्मच हल्दी गर्म दूध में मिलाकर सेवन करें। इससे गले में जमा कफ निकल जाता है और खांसी में आराम मिलता है।
• हल्दी के 2 ग्राम चूर्ण में थोड़ा सा सेंधानमक मिलाकर खाने और ऊपर से थोड़ा सा पानी पीने से खांसी का रोग दूर होता है।
• खांसी के साथ छाती में घबराहट हो तो हल्दी और नमक को गर्म पानी में घोलकर पीना चाहिए। खांसी अगर पुरानी हो तो 4 चम्मच हल्दी के चूर्ण में आधा चम्मच शहद मिलाकर खाना चाहिए
२- बांस : 6-6 मिलीलीटर बांस का रस, अदरक का रस और शहद को एक साथ मिलाकर कुछ समय तक सेवन करने से खांसी, दमा आदि रोग ठीक हो जाते हैं।
३- शहद : पुराना शहद ही सर्वोत्तम औषधि है कम से कम एक वर्ष पुराना होना चाहिए
• 5 ग्राम शहद में लहुसन का रस 2-3 बूंदे मिलाकर बच्चे को चटाने से खांसी दूर होती है।
• थोड़ी सी फिटकरी को तवे पर भूनकर एक चुटकी फिटकरी को शहद के साथ दिन में 3 बार चाटने से खांसी में लाभ मिलता है।
• एक चम्मच शहद में आंवले का चूर्ण मिलाकर चाटने से खांसी दूर होती है।
• एक नींबू को पानी में उबालकर गिलास में इसका रस निचोड़ लें और इसमें 28 मिलीलीटर ग्लिसरीन व 84 मिलीलीटर शहद मिलाकर 1-1 चम्मच दिन में 4 बार पीएं। इससे खांसी व दमा में आराम मिलता है।
• 12 ग्राम शहद को दिन में 3 बार चाटने से कफ निकलकर खांसी ठीक होती है।
• चुटकी भर लौंग को पीसकर शहद के साथ दिन में 3 से 4 बार चाटने से आराम मिलता है।
• शहद और अडूसा के पत्तों का रस एक-एक चम्मच और आधा चम्मच अदरक का रस मिलाकर पीने से खांसी नष्ट होती है।
• ‎एक चम्मच अदरक का रस हल्का गर्म कर एक चम्मच शहद मिलाकर दिन में 3 बार सेवन करने से 2 से 3 दिन
४- हरीतकी : हरीतकी चूर्ण सुबह-शाम कालानमक के साथ खाने से कफ खत्म होता है और खांसी में आराम मिलता है।
५-कपूर:
• 1 से 4 ग्राम कपूर कचरी को मुंह में रखकर चूसने से खांसी ठीक होती है।
• बच्चों को खांसी में कपूर को सरसो तेल में मिलाकर छाती और पीठ पर मालिश करने से खांसी का असर दूर होता है
६- सौंफ :
• 2 चम्मच सौंफ और 2 चम्मच अजवायन को 500 मिलीलीटर पानी में उबालकर इसमें 2 चम्मच शहद मिलाकर हर घंटे में 3 चम्मच रोगी को पिलाने से खांसी में लाभ मिलता है।
• सौंफ का 10 मिलीलीटर रस और शहद मिलाकर सेवन करने से खांसी समाप्त होती है।
• सूखी खांसी में सौंफ मुंह में रखकर चबाते रहने से खांसी दूर होती है।
७- केसर : बच्चों को सर्दी खांसी के रोग में लगभग आधा ग्राम केसर गर्म दूध में डालकर सुबह-शाम पिलाएं और केसर को पीसकर मस्तक और सीने पर लेप करने से खांसी के रोग में आराम मिलता है।
८- कटेरी :
• ज्यादा खांसने पर भी अगर कफ (बलगम) न निकल रहा हो तो छोटी कटेरी की जड़ को छाया में सुखाकर बारीक पीसकर चूर्ण बना लें। यह 1 ग्राम चूर्ण में 1 ग्राम पीपल का चूर्ण मिलाकर थोड़ा सा शहद मिलाकर दिन में 2-3 बार चाटने से कफ आसानी से निकल जाता है और खांसी में शान्त होता है।
• छोटी कटेरी के फूलों को 2 ग्राम केसर के साथ पीसकर शहद मिलाकर सेवन करने से खांसी ठीक होती है।
• लगभग 1 से 2 ग्राम बड़ी कटेरी के जड़ का चूर्ण सुबह-शाम शहद के साथ सेवन करने से कफ एवं खांसी में बहुत अधिक लाभ मिलता है।
• लगभग 10 ग्राम कटेरी, 10 ग्राम अडूसा और 2 पीपल लेकर काढ़ा बनाकर शहद के साथ सेवन करने से खांसी बन्द हो जाती है।
९- जायफल : जायफल, पुष्कर मूल, कालीमिर्च एवं पीपल बराबर मात्रा में लेकर बारीक चूर्ण बनाकर 3-3 ग्राम चूर्ण सुबह-शाम शहद के साथ सेवन करने से खांसी दूर होती है।
१०- सोंठ :
• सोंठ, कालीमिर्च, पीपल, कालानमक, मैनसिल, वायबिडंग, कूड़ा और भूनी हींग को एक साथ मिलाकर चूर्ण बना लें। यह चूर्ण प्रतिदिन खाने से खांसी, दमा व हिचकी रोग दूर होता है।
• सोंठ, कालीमिर्च और छोटी पीपल बराबर मात्रा में लेकर चूर्ण बना लें। इस 1 ग्राम चूर्ण को शहद के साथ दिन में 2-3 बार चाटने से हर तरह की खांसी दूर होती है और बुखार भी शान्त होता है।
• यदि कोई बच्चा खांसी से परेशान हो तो उसे सोंठ, कालीमिर्च, कालानमक तथा गुड़ का काढ़ा बनाकर पिलाना चाहिए। इससे बच्चे को खांसी में जल्द आराम मिलता है।
• सोंठ, छोटी हरड़ और नागरमोथा का चूर्ण समान मात्रा में लेकर इसमें दुगना गुड़ मिलाकर चने के बराबर गोलियां बनाकर मुंह में रखकर चूसने से खांसी और दमा में आराम मिलता है।
११- अडूसा (वासा) :
• वासा के ताजे पत्ते के रस, शहद के साथ चाटने से पुरानी खांसी, दमा और क्षय रोग (टी.बी.) ठीक होता है।
• अडूसा के पत्तों का रस एक चम्मच, एक चम्मच अदरक का रस और एक चम्मच शहद मिलाकर पीने से सभी प्रकार की खांसी से आराम मिलता है।
• अडूसे के पत्तों के 20-30 मिलीलीटर काढ़ा में छोटी पीपल का एक ग्राम चूर्ण डालकर पीने से पुरानी खांसी, दमा और क्षय रोग में लाभ मिलता है।
• अडूसे के पत्तों के 5 से 15 मिलीलीटर रस में अदरक का रस, सेंधानमक और शहद मिलाकर सुबह-शाम रोगी को खिलाने से कफयुक्त बुखार और खांसी ठीक होती है।
• अडूसा और तुलसी के पत्तों का रस बराबर मात्रा में मिलाकर पीने से खांसी मिटती है।
• अडूसा और कालीमिर्च का काढ़ा बनाकर ठंड़ा करके पीने से सूखी खांसी नष्ट होती है।
• अडूसा के रस में मिश्री या शहद मिलाकर चाटने से सूखी खांसी ठीक होती है।
• अडूसा के पेड़ की पंचांग को छाया में सुखाकर चूर्ण बनाकर प्रतिदिन 10 ग्राम सेवन करने से खांसी और कफ विकार दूर होता है।
• अडूसा के पत्ते और पोहकर की जड़ का काढ़ा बनाकर सेवन करने से दमा व खांसी में लाभ मिलता है।
• अडूसा की सूखी छाल को चिलम में भरकर पीने से दमा व खांसी दूर होती है।
• अडूसा, तुलसी के पत्ते और मुनक्का बराबर मात्रा में लेकर काढ़ा बनाकर सुबह-शाम पीने से खांसी दूर होती है।
‎12 अलसी मिश्री या समान मात्रा ( 10 ग्राम) 1 गिलास पानी मे काढ़ा बनाये व दिन में 2 बार सेवन करें।
13. पंचगव्य धृत का उपयोग नस्य हेतु करे
14. दालचीनी सौठ मुलेठी के चूर्ण समान मात्रा में शहद या गुड़ के साथ करें
15. अजवायन की भाप व अजवायन का नस्य ले ( हल्का गर्म कर रुमाल में बांध कर सूंघे)
16. ‎पानी गुनगुना ही पिये
17. ‎चाय पीनी हो तो तुलसी अजवायन लौंग दालचीनी सौठ कम से कम किसी एक का उपयोग जरूर करें
18. ‎पुराना गुड़ , सरसो तेल व हल्दी मिलाकर दिन में 3 से 4 बार सेवन करें
19. ‎3 ग्राम देशी गाय के घी में 6 ग्राम शहद मिलाकर सेवन करने से
20. ‎गुद्दा मार्ग पर सरसों तेल चुपड़ने से सूखी खाँसी नष्ट होती है
21. ‎पान के रस में शहद मिलाकर सेवन करने से कफ, खाँसी नष्ट हो जाती है
22. ‎गाय के गर्म दूध में कालीमिर्च व मिश्री मिलाकर पीने से
23. ‎अदरक के रस में गाय का घी मिलाकर गर्म कर इसे थोड़ा थोड़ा दूध के साथ पीलाने से बच्चो की कुकर खाँसी नष्ट होती है
24. 125 ml गाय के दूध में 125ml पानी व आधा चम्मच गाय का घी मिलाकर गर्म करे जब पानी जल जाए तो इसे थोड़ा थोड़ा दूध के साथ पीलाने से बच्चो की कुकर खाँसी नष्ट होती है
25. ‎पुराना गुड़ सौठ व कालीमिर्च मिलाकर सेवन करने से खाँसी जुकाम नष्ट होता है
26. ‎कालीमिर्च व बताशा उबालकर गर्मागर्म पीने से पसीना आने के बाद जुकाम,खाँसी व शरीर की जकड़न नष्ट होती है।
**कौन कहता है होम्योपैथी में खांसी का सटीक इलाज नहीं है।**
डॉ वेद प्रकाश मानते हैं कि खांसी का एलोपैथी में खास अच्छा इलाज नहीं हैं. चिकित्सक आम तौर पर मीठे शरबत रूप में कई दवाओं का मिक्चर मरीज को देते हैं, जिसमें एल्कोहल काफी मात्रा में होती है, जिसकी वजह से गले का तनाव कम होता है और मरीज को कुछ राहत महसूस होती है- और काफी बार खांसी खुद ही ठीक हो जाती है. कई बार खांसी अपना विकराल रूप धारण करती है और टीबी, दमा, फेंफड़े कमजोर होने में तबदील हो जाती है. लेकिन होम्योपैथी में ऐसा नहीं है.
होम्योपैथी में खांसी का सटीक इलाज है, चाहे खांसी कोई भी हो, कैसी भी और किसी भी कारण से हो. बस आपको लक्षण देखने हैं और दवाई दे देनी या खा लेनी है. कुछ दवाओं का विवरण नीचे दिया जा रहा है.
*एंटीम टार्ट*: शरीर में कफ बनने की प्रवृत्ति , बलगम गले में फंसा लगना, छाती में कफ जमा महसूस होना, छाती में घड़-घड़ की आवाज आना, रात को खांसी बढ़ना, बलगम निकालने की कोषिष में काफी बलगम निकलना, खांसी के साथ उल्टी हो जाना इसके लक्षण हैं.
*कार्बोवेज:* गरमी से खांसी कम होना, गले में सुरसुरी होने की वजह से लगातार खांसने की इच्छा होना,खांसना. अचानक तेज खांसी उठना. कोई ठण्डी वस्तु खाने, पीने से, ठण्डी हवा से , षाम को खांसी बढ़ना. गले में खराष महसूस होना. बारिश, सर्दी के मौसम में तकलीफ बढ़ना.
हीपर सल्फ: इसकी खांसी बदलती रहती है, सूखी हो सकती है, और बलगम वाली भी. हल्की सी ठण्ड लगते ही खांसी हो जाती है. यही इस दवा का प्रमुख लक्षण भी है. ढीली खांसी व काली खांसी में भी यह विशेष फायदा करती है. जिस समय ठण्डा मौसम होता है, उस समय अगर खांसी बढ़ती हो, तब भी यह फायदा पहुंचाती है. जैसे सुबह, रात को खांसी बढ़ना. लेकिन ध्यान रखें कि यदि *स्पंजिया* दे रहे हों, *हीपर सल्फ* नहीं देनी चाहिए, यदि *हीपरसल्फ* दे रहे हों, *स्पंजिया* नहीं देनी चाहिए.
*फेरम फाॅस*: रक्त संचय में अपनी क्रिया करती है. कोई तकलीफ एकाएक बढ़ जाना, किसी तकलीफ की प्रथम अवस्था में इसका अच्छा इस्तेमाल किया जाता है. यह दवा किसी भी प्रकार की खांसी- चाहे बलगमी हो या सुखी सब में फायदा करती है. कमजोर व्यक्तियों को ताकत देने में यह दवा काम में लाई जाती है. क्योंकि कुछ रोग कमजोरी, खून की कमी की वजह से लोगों को परेषान करते हैं. अतः खून में जोश पैदा करने का काम करती है.
*नेट्रम सल्फ*: जब मौसम में नमी अधिक होती है, चाहे मौसम सर्दी का हो या बारिश का या फिर और रात, उस समय खांसी बढ़ती है. खांसते-खांसते मरीज कलेजे पर हाथ रखता है, क्योंकि खांसने से कलेजे में दर्द बढ़ता है. दर्द बाईं तरफ होता है. दवा दमा रोगियों को फायदा करती है. क्योंकि दमा रोगियों की तकलीफ भी बारिष के मौसम व ठण्ड के मौसम में बढ़ती है.
*संेगुनेरिया:* रात में भयंकर सूखी खांसी, खांसी की वजह से मरीज सो नहीं सकता, परेषान होकर उठ जाना और बैठे रहना. लेकिन बैठने से तकलीफ कम न होना. सोने पर खांसी बढ़ना. दस्त के साथ खांसी. इसके और भी लक्षण है, महिलाओं को ऋतु गड़बड़ी की वजह से खांसी हुई हो तो उसमें यह फायदा कर सकती है. पेट में अम्ल बनने की वजह से खांसी होना, डकार आना. हर सर्दी के मौसम में खांसी होना- यह भी इस दवा के लक्षण है.
*केल्केरिया फास:* जब गले में बलगम फंस रहा हो, छाती में बलगम जमा हो तो यह उसे ढीला कर देती है. जब बच्चे खांस-खांसकर परेशान होते हैं, उस समय भी इससे फायदा होते देखा गया है. यह दवा बच्चों में कैल्षियम की कमी को भी दूर करती है. गले में बलगम फंसना, छाती में बाईं तरफ दर्द में भी यह दवा दी जाती है.
*चायना*: चायना का कमजोरी दूर करने भूख बढ़ाने में बहुत अच्छा काम है. खांसी हो, भूख कम लगती हो तो कोई भी दवा लेते समय यह दवा ले लेनी चाहिए. काफी बार लिवर की कमजोरी, षरीर की कमजोरी की वजह से बार-बार खांसी परेषान करती है, बार-बार निमोनिया हो जाता है, खासकर बच्चों को. यदि चायना, केल्केरिया फास, फेरम फाॅस कुछ दिन लगातार दी जाए तो इस समस्या से छुटकारा पाया जा सकता है. इस दवा के खांसी में मुख्य लक्षण है- खांसते समय दिल धड़कने लगता है, एक साथ खांसी अचानक आती है कपड़े कसकर पहनने से भी खांसी होती है. इसकी खांसी अक्सर सूखी होती है.
बोरेक्स: बलगम में बदबू व खांसते समय दाहिनी तरफ सीने में दर्द तथा ऊपर की तरफ चढ़ने पर सांस फूलना इसके लक्षण है. यह दवा टीबी तक की बीमारी में काम लाई जाती है.
*काली म्यूर*: यह दवा फेंफड़ों में पानी जमना, निमोनिया, काली खांसी में काम आती है. एक लक्षण इसका मुख्य है- बलगम गाढ़ा, गोंद जैसा आना.
*बेलाडोना*: गले में दर्द के साथ खांसी, खांसी की वजह से बच्चे का रोना, कुत्ता खांसी, भयंकर परेशान कर देने वाली खांसी, खांसी का रात को बढ़ना. खांसी सूखी होना या काफी खांसी होने के बाद या कोषिष के बाद बलगम का ढेला सा निकलना. गले में कुछ फंसा सा अनुभव होना. बलगम निकलने के बाद खांसी में आराम होना, फिर बाद में बढ़ जाना.
*स्पंजिया टोस्टा:* यह दवा काली खांसी की बहुत ही अच्छी दवा मानी जाती है. जब सांस लेने में दिक्कत महसूस होती हो तो इसका प्रयोग अच्छा रहता है. गले में दर्द के साथ खांसी हो तो उसमें भी यह अच्छा काम करती है. यदि काली खांसी के साथ बुखार हो तो पहले *एकोनाइट* दे देनी चाहिए. इस दवा के और भी लक्षण हैं. कोई गरम चीज खाने से खांसी घटना और ठण्डी हवा, ठण्डा खान-पान, मीठा खाने बातचीत करने, गाने से खांसी बढ़ना, खांसते समय गले से सीटी बजने या लकड़ी चीरने की आवाज निकलना.
*इपिकाक*: इसका मुख्य लक्षण है, खांसी के साथ उल्टी हो जाना. उल्टी आने के बाद खांसी कुछ ठीक सी लगती है. सांस लेते समय घड़-घड़ जैसी आवाज आना, सीने में बलगम जमना आदि इसके लक्षण हैं. यह दवा काफी तरह की खांसियों में फायदा करती है, चाहे निमोनिया हो या दमा. कई बार ठण्ड लगकर बच्चों को खांसी हो जाती उसमें भी फायदा करती है. खांसते-खांसते मुंह नीला, आंख नीली हो जाना, दम अटकाने वाली खांसी छाती में बलगम जमना आदि इसके लक्षण हैं.
*हायोसियामस* नाइगर: सूखी खांसी. रात को खांसी अधिक होना, सोने पर और अधिक खांसी बढ़ जाना, मरीज परेशान होकर उठकर बैठ जाता है, लेकिन उसके बैठने से खांसी घट जाती है.
मैग्नेसिया म्यूर: इसका मुख्य लक्षण है कि इसकी खांसी सोने पर घट जाती है.
*एसिड कार्ब*: किसी को कैसी भी खांसी हो, किसी बीमारी के साथ हो, यह सब में फायदा कर सकती है. शोच, बलगम में बदबू हो तो काफी फायदा हो सकता है. इसमें लगातार खांसी आकर परेषान करती है.
*कालचिकम औटमनेल:* यह दवा तन्दुरुस्त लोगों को अधिक फायदा करती है. इसका प्रमुख लक्षण है, कोई तकलीफ या खांसी किसी गंद या रसोई की गंद से बढ़ना. इसमें तकलीफ हिलने से भी व सूर्य ढूबने के बाद बढ़ती.
*चेलिडोनियम*: दाहिने कन्धे में दर्द होना, तेजी से सांस छोड़ना, बलगम जोर लगाने से निकलना, वो भी छोटे से ढेले के रूप में. सीने में से बलगम की आवाज आना इस दवा के प्रमुख लक्षण है. लिवर दोश की वजह से हुई खांसी में बहुत बढि़या क्रिया दिखाती है. खांसते-खांसते चेहरा लाल हो जाता है. खसरा व काली खांसी के बाद हुई दूसरी खांसी में इससे फायदा होता है.
*कास्टिकम*: खांसी हर वक्त होते रहना. सांस छोड़ने व बातचीत करने से खांसी बढ़ना. खांसी के साथ पेषाब निकल जाना. ठण्डा पानी पीने खांसी घटना. छाती में दर्द तथा बलगम निकलने कोषिष में बलगम न निकाल सकना और बलगम अन्दर सटक लेना. रात में बलगम अधिक निकलना इस दवा के लक्षण है.
*कोनियम मैकुलेटम:* बद्हजमी के साथ खांसी. खांसी सूखी जो स्वर नली में उत्तेजना से उत्पन्न खांसी. इस दवा का प्रमुख लक्षण है, खांसी रात को ही अधिक बढ़ती है, जैसे कहीं से उड़कर आ गई हो. खांसी के साथ बलगम आता है तो मरीज उसे थूकने में असमर्थ होता है, इसलिए उसे सटक जाता है.
*ब्रायोनिया एल्ब:* खांसी के साथ दो-तीन छींक आना. सिर दर्द के साथ खांसी. हाथ से सीना दबाने पर खांसी घटना. सूखी खांसी. गले में कुटकुटाहट होकर खांसी होना यदि बलगम होता है बड़ी मुष्किल से निकलता है जिसपर खून के छींटे होते है या बलगम पीला होता है. खाना खाने के बाद या गरमी से खांसी बढ़ना इसके प्रमुख लक्षण हैं.
*रियुमेक्स*: खांसते समय पेषाब निकल जाना, गला अकड़ जाना, सूखी खांसी, मुंह में ठण्डी हवा जाने, षाम को, कमरा बदलने हवा के बदलाव की वजह से खांसी बढ़ना इसके प्रमुख लक्षण है. इस दवा का एक और लक्षण है गर्दन पर हाथ लगाने से खांसी अधिक होती है. गरमी से तथा मुंह ढकने से खांसी कम होती है.
*एसिड फाॅस:* जरा सी हवा लगते ही ठण्ड लग जाना. सोने के बाद, सुबह, शाम को खांसी अधिक होती है. खांसी पेट से आती सी महसूस होती है. बलगम का रंग पीला होता है, जिसका स्वाद नमकीन होता है.
*कार्डुअस*: लीवर के ठीक से काम न करने की वजह से होने वाली खांसी में इससे फायदा होता है. इसका एक और लक्षण है कि जब खांसी आती है तो उसके साथ कलेजे के पास भी दर्द होता है.
*कैप्सिकम*: गले में मिर्ची डालने की सी जलन तथा खांसने में बदबू आना, खांस-खांसकर थक जाना तथा थोड़ा सा बलगम निकलना, बलगम निकलने पर आराम महसूस होना इसके प्रमुख लक्षण हैं. इन लक्षणों में दमा में यह दवा काम करती है.
*स्कुइला*: छींक आने व आंख से पानी टपकने साथ तेज खांसी. अपने आप बूंद-बूंद पेशाब निकलना. सीने में कुछ चुभोने की तरह दर्द होना.
*बैराइटा कार्ब:* बहुत बार टाॅंसिल बढ़ने, गले में दर्द के साथ खांसी हो जाती है. यह दवा टांसिल की बहुत अच्छी दवा है. यदि दूसरी दवाओं के साथ उपरोक्त तकलीफ के साथ हुई खांसी में इसकी 200 पावर की दवा हफ्ते में एक बार ले लेनी चाहिए या गोलियों बनाकर 4 गोली सुबह 4 गोली षाम को लेनी चाहिए. इस दवा का एक और लक्षण है कि जरा सी ठण्डी हवा लगते ही या ठण्डे पानी से हाथ मुंह धोने से खांसी जुकाम हो जाता है. जुकाम छींक वाला होता है.
*काली फास*: यह दवा षरीर में ताकत लाने व जीवनी षक्ति जगाने का काम करती है. जब काफी दवा देने के बाद भी आराम न आ रहा हो तो लक्षण अनुसार अन्य दवा देते हुए भी इसका प्रयोग कर सकते है, संभव है फायदा हो. दमा रोगियों को इससे काफी फायदा होते देखा गया है.
*लाईको पोडियम*: इसकी खांसी दिन रात उठती रहती है. खांसने की वजह से पेट में दर्द हो जाता है. गलें मेंसुरसुरी होकर खांसी होती है. बलगम युक्त खांसी में कई बार बलगम नहीं निकलता, निकलता है बहुत ज्यादा वो भी या तो हरा होता है या पीला पीब जैसा. कई बार एक दिन खांसी ठीक रहती है, किन्तु दूसरे दिन फिर खांसी परेषान करती है. ठण्डी चीजें खाने से खांसी बढ़ती है व षाम को खांसी अधिक होती है. खांसी ऐसी हो कि टीबी होने की संभावना हो तो यह दवा जरूर दें. यह जहां खांसी जल्दी ठी करेगी व टीबी होने की संभावना को भी खत्म करेगी.
नोट: उपरोक्त लेख केवल होम्योपैथी के प्रचार हेतु है. कृपया बिना डाॅक्टर की सलाह के दवा इस्तेमाल न करें. अगर अपने मन से कोई भी दवाई लेते हैं और कोई भी दवा लेने के बाद विपरीत लक्षण होने पर लेखक या ग्रुप एडमिन की कोई जिम्मेवारी नहीं है.
ध्यान रखने योग्य कुछ दवाई
*एकोनाइट नेपलेस*यह भी ध्यान रखें कि किसी समय खांसते-खांसते काफी परेषानी हो रही हो, बेचैनी घबराहट लगे, पानी की प्यास भी तो एकोनाइट नेपलेस-30* की एक खुराक दे देनी चाहिए. यह किसी भी तकलीफ की बढ़ी हुई अवस्था, घबराहट, बेचैनी में बहुत अच्छा काम करती है तथा तकलीफ की तीव्रता कम कर देती है. यदि साथ ही तेज प्यास लग रही हो, बार-बार पानी पीना पड़ता हो तो इस दवा के फेल होने की संभावना बहुत मुष्किल ही है.
*बेसलीनमः* यह दवा टीबी से ग्रसित फेफड़े की पीब से तैयार होती है. जब खांसी पुरानी हो, टीबी के से लक्षण हों, पीला बलगम हों- कई बार खून के छींटे भी बलगम में हो सकते हैं. खांसते समय गले, छाती में दर्द हो तो हफ्ते में केवल 2 बंूद 200 पावर की दवा लें. इसकी कम पावर की दवा नहीं लेनी चाहिए, 200 या 200 से ऊपर पावर की दवा ले सकते हैं. 2-3 बार से अधिक बार भी यह नहीं लेनी चाहिए. बार-बार इस दवा का दोहारण भी ठीक नहीं.
लक्षण मिलने पर यह दवा बहुत तीव्र गति से अपनी क्रिया दिखाती है और लक्षणों को दूर करती है. बलगम का रंग बदलती है. यदि टीबी न हुई तो तो उसे रोकती है. यदि हो गई हो तो उसे बढ़ने से रोकती है. नियमित रूप से लेना लक्षण अनुसार दूसरी लेनी चाहिए. यदि किसी भी दवा से खांसी में आराम न आ रहा हो तो अन्य दवाओं को अपनी क्रिया करने का मार्ग प्रशस्त करती है.
*सल्फर*ः खांसी बलगम वाली हो, सुबह बढ़ती है. छाती में से बलगम की घड़घड़ाहट जैसी आवाज आती हो, खांसकर बायें फेंफड़े में से तो इनमें से कोई लक्षण रहने पर कई दवाईंयां लक्षण मिलान करके देने के बावजूद आराम न आ रहा हो सुबह खाली पेट एक खुराक तीस पावर की जरूर देकर देखें, चाहे लिक्विड में दें चाहे गोलियों में बनाकर.
पूरी पोस्ट पढ़ने के लिए बहुत बहुत आपका धंयवाद
अमर शहीद राष्ट्रगुरु, आयुर्वेदज्ञाता, होमियोपैथी ज्ञाता स्वर्गीय भाई राजीव दीक्षित जी के सपनो (स्वस्थ व समृद्ध भारत) को पूरा करने हेतु अपना समय दान दे
मेरी दिल की तम्मना है हर इंसान का स्वस्थ स्वास्थ्य के हेतु समृद्धि का नाश न हो इसलिये इन ज्ञान को अपनाकर अपना व औरो का स्वस्थ व समृद्धि बचाये। ज्यादा से ज्यादा शेयर करें और जो भाई बहन इन सामाजिक मीडिया से दूर हैं उन्हें आप व्यक्तिगत रूप से ज्ञान दें।

Monday, January 14, 2019

Ashtanga Hridaya of Bagbhat- Indian Ayurvedic system


Chapter 1: Ayushkameeya आय

कामीयं Adhyaya
“Desire for long life”
1. Salutations
रागाद रोगान सततान ् ु
षतान्शेषकायसतानशेषान ृ औस ् ु
यमोहारतदाजघान
यो अपू
ववैयाय नमो अतु
तमै
Salutation to The Unique and Rare Physician, who has destroyed, without any residue all the
diseases like Raga (lust, anger, greed, arrogance, jealousy, selfishness, ego), which are constantly
associated with the body, which is spread all over the body, giving rise to disease, delusion and
restlessness.
This salutation is done to Lord Dhanwantari.
2. Purpose of life: Essential quality to learn Ayurveda
आयु: कामायमानेन धमाथ सु
खसाधनम । आय ् ु
वदोपदेशेषु
वधेय: परमादर: ॥
āyu: kāmāyamānena dharmārtha sukhasādhanam | āyurvedopadeśeṣu vidheya: paramādara: ||
To achieve the purpose of life, that is
1. Dharma – following the path of righteousness
2. Artha – earning money in a legal way
3. Kama – fulfilling our desire
4. Moksha – achieving Salvation,
To achieve this purpose of life, one should concentrate on having a long life. To learn the science
of Ayurveda, which explains how to achieve this purpose, ‘obedience’ (Vidheya) is the most
important quality.
3. Origin of Ayurveda
मा मवा आय ृ ु
षो वेदं जापतमिजहेसो अिवनौ तौ सहां सो अपु
ादकामु
नीते
अिनवेशादकांते टु पथकृ ् ताण तेनरे
Lord Brahma, remembering Ayurveda, taught it to Prajapathi, he in turn taught it to Ashwini
Kumaras (twins), they taught it to Sahasraksa (Lord Indra), he taught it to Atri’s son (Atreya
Punarvasu) and other sages, they taught it to Agnivesa and others and they (Agnivesha and other
disciples ) composed treatises, each one separately.
Astanga Hridaya Sutrasthan
Page No. 3 Astanga Hridaya Sutrasthan
4 – 4.5. Funda of Ashtanga Hrudayam:
तेयो अतवकययः ायः सारतरोचयःयते अटागदयं नातसंेपवतरम ्
From those Ayurvedic text books, which are too elaborate and hence very difficult to study, only
the essence is collected and presented in Ashtanga Hridaya, which is neither too short nor too
elaborate.
4.5-5.5 – Branches of Ayurveda
कायबालहोवाग शयदंा जरावषानृ ्|| अटावगान तयाहु: चकसा येषु
संता |
kāyabālagrahordhvāṅga śalyadaṃṣṭrā jarāvṛṣān || aṣṭāvaṅgāni tasyāhu: cikitsā yeṣu saṃśritā |
1. Kaya Chikitsa – General medicine
2. Bala Chikitsa – Paediatrics
3. Graha Chikitsa – Psychiatry
4. Urdhvanga Chikitsa – Diseases and treatment of Ear, Nose, Throat, Eyes and Head
(neck and above region)
5. Shalya Chikitsa – Surgery
6. Damshrta Chikitsa – Toxicology
7. Jara Chikitsa – Geriatrics
8. Vrushya Chikitsa – Aphrodisiac therapy
These are the eight branches of Ayurveda.
5.5 – 6.5 Tridosha
वायु: पतं कफचेत यो दोषा: समासत: ॥ वकृताऽवकृता देहं नित ते वतयित च ।
vāyu: pittaṃ kaphaśceti trayo doṣā: samāsata: || vikṛtā’vikṛtā dehaṃ ghnanti te varttayanti ca |
Vayu – Vata, Pitta and kapha are the three Doshas of the body. Perfect balance of three Doshas
leads to health, imbalance in Tridosha leads to diseases.
6.5-7.5 How Thridosha are spread in body and in a day?
ते यापनोऽप नायोरधोमयोव संया: ॥
वयोऽहोराभु
तानां तेऽतमयादगा: मात ।्
te vyāpino’pi hṛnnābhyoradhomadhyordhva saṃśrayā: ||
vayo’horātribhuktānāṃ te’ntamadhyādigā: kramāt |
The Tridosha are present all over the body, but their presence is especially seen in particular
parts. If you divide the body into three parts, the top part upto chest is dominated by Kapha
Dosha, between chest and umbilicus is dominated by Pitta, below umbilicus part is dominated by
Vata.
Astanga Hridaya Sutrasthan
Page No. 4 Astanga Hridaya Sutrasthan
Similarly, in a person’s life, day and in night (separately), the first part is dominated by Kapha,
second part is dominated by Pitta and third part is dominated by Vata. While eating and during
digestion, the first, second and third part are dominated by Kapha, Pitta and Vata respectively.
7.5 Types of digestive fires
तैभवेवषम: तीणो मदचािन: समै: सम: ॥
tairbhavedviṣama: tīkṣṇo mandaścāgni: samai: sama: ||
There are four types of Digestive fires (Agni)
1. Vishama Agni – Influenced by Vata. A person with Vishama Agni will sometimes
have high appetite, and sometimes, low appetite.
2. Teekshna Agni - Influenced by Pitta. A person with Teeksna Agni will have high
digestion power and appetite.
3. Manda Agni - Influenced by Kapha. A person with Manda Agni will have low
digestion power and appetite.
4. Sama Agni - Influenced by perfect balance of Tridosha – Where person will have
proper appetite and digestion power. Digestion occurs at appropriate time.
8.5 Types of digestive tracts / nature of bowels
कोठ: ूरो मदृ मयो मय: यातै: समैरप ।

koṣṭha: krūro mṛdurmadhyo madhya: syāttai: samairapi |
There are three types of digestive tracts (Koshta):
1. Kroora Koshta – wherein the person will take long time for digestion. The bowel
evacuation will be irregular. It is influenced by Vata.
2. Mrudu Koshta – Sensitive stomach, has a very short digestion period. Even
administration of milk will cause bowel evacuation.
3. Madhya Koshta – Proper digestive tract, bowel evacuation at appropriate times. It is
influenced by Tridosha balance.
9-10 Types of Prakruti – Body Types
शु
ातवथै: जमादौ वषेणैव वषकृमे: ॥ तैच त: कृतयो हनमयोतमा: पथकृ ् ।
समधात: समतास ु ु
ेठा नया वदोषजा ॥
śukrārtavasthai: janmādau viṣeṇaiva viṣakṛme: || taiśca tisra: prakṛtayo hīnamadhyottamā: pṛthak |
samadhātu: samastāsu śreṣṭhā nindyā dvidoṣajā ||
Like the poison is natural and inherent to poisonous insects, similarly, the Prakruti (body type) is
inherent to humans. The body type is decided during conception, based on qualities of sperm and
ovum.
Vata prakruti – Vata body type is considered as low quality
Pitta Prakruti – Pitta body type is considered as moderate quality
Kapha Prakruti – Kapha body type is considered good quality.
Astanga Hridaya Sutrasthan
Page No. 5 Astanga Hridaya Sutrasthan
Tridosha body type – influenced equally by Vata, Pitta and Kapha is considered the
best quality.
Dual body types, Like Vata-Pitta, Pitta-Kapha, Vata-Kapha body types are
considered as not good.
10.5 Qualities of Vata
त ो लघु: शीत: खर: सू
मचलोऽनल: ॥
tatra rūkṣo laghu: śīta: khara: sūkṣmaścalo’nila: ||
Rooksha – dryness, Laghu – Lightness, Sheeta – coldness, Khara – roughness, Sookshma –
minuteness, Chala – movement These are the qualities of Vata.
11. Qualities of Pitta
पतं सनेह तीणोणं लघु
वं सरं वम ।्
pittaṃ sasneha tīkṣṇoṣṇaṃ laghu visraṃ saraṃ dravam |
Sasneha – slightly oily, unctuous, Teekshna – piercing, entering into deep tissues, Ushna –
hotness, Laghu – lightness, Visram – bad smell, sara – having fluidity, movement, drava –
liquidity are the qualities of Pitta.
12. Qualities of Kapha
िनध: शीतो गमद: लणो म ु न: िथर: कफ: ॥ ृ
snigdha: śīto gururmanda: ślakṣṇo mṛtsna: sthira: kapha: ||
Snigdhna – oily, unctuous, Sheeta – cold, Guru – heavy, Manda – mild, viscous, shlakshna –
smooth, clear, Mrutsna – slimy, jely, sthira – stability, immobility are the qualities of Kapha.
संसगः सिनपातच तवयकोपतः
The increase, decrease of individual Doshas, or imbalance of couple of these Doshas is called as
Samsarga. And imbalance of all the three Doshas together is called as Sannipata.
13. Body tissues and waste products
रस असकृ ् मांस मेदो अिथ मज शु
ाण धातव: ।
सत दया: मला: म ू ू
शकृत वेदादयोऽप च ॥ ्
rasa asṛk māṃsa medo asthi majja śukrāṇi dhātava: |
sapta dūṣyā: malā: mūtra śakṛt svedādayo’pi ca ||
Body tissues and waste products are called as Dushyas. Means, there are influenced, and affected
by Doshas. Body tissues are -
Astanga Hridaya Sutrasthan
Page No. 6 Astanga Hridaya Sutrasthan
1. Rasa - the first product of digestion, Soon after digestion of food, the digested food
turns into Rasa. It is grossly compared to lymph or plasma. But it is not a complete
comparison.
2. Rakta – Also called as Asruk. – Blood
3. Mamsa – Muscle
4. Meda - Fat tissue
5. Asthi - Bones and cartilages
6. Majja - Bone marrow
7. Shukra – Semen / Ovum or entire male and female genital tract and its secretions are
grossly covered under this heading.
Mala – waste products
Shakrut / Pureesha – (faeces), Sweda (sweat) and Mootra (urine) are the three waste products of
the body.
13.5 Nature of increase and decrease
व: समानै: सवषां वपरतै: वपयय: । ृ
vṛddhi: samānai: sarveṣāṃ viparītai: viparyaya: |
Equal qualities lead to increase, and opposing qualities lead to decrease. For example, dryness is
the quality of Vata. If a Vata body type person exposes himself to dry cold weather, his dryness
and in turn Vata will increase, leading to dry skin. In the same way, oiliness is opposite quality of
dryness. If he applies oil to the skin, then the dryness and related Vata is decreased.
13.5 Six tastes
रसाः वावललवणततोषणकषायकाःष यमाताते च यथापू
व बलावहाः
Svadu – Madhura – sweet, Amla – Sour, Lavana – Salt, Tikta – Bitter, Ushna – Katu – Pungent,
Kashaya – Astringent are the six types of Rasa.
They are successively lower in energy. That means, Sweet taste imparts maximum energy to
body and the astringent, the least.
14. Effect of tastes on Tridosha
ताया मातं नित य: ततादय: कफम ।्
कषाय तत मधु
रा: पतमये त कु ुवते ॥
tatrādyā mārutaṃ ghnanti traya: tiktādaya: kapham |
kaṣāya tikta madhurā: pittamanye tu kurvate ||
In the list of tastes, the first three, i.e. Sweet, sour and salt mitigates Vata and increases Kapha.
The last three, i.e. bitter, pungent and astringent tastes mitigates Kapha and increases Vata
Astringent, bitter and sweet taste mitigates Pitta. Sour, salt and pungent tastes increase Pitta.
More attached astanga hridaya sutrasthan-vagbhat
astanga hridaya sutrasthan-vagbhat

Thursday, December 6, 2018

Carcinogenic weed killer glycophosphate in foods

Monsanto has been using carcinogenic gylycophosphare weed killer that is also found in roundup in our daily foods that is packed in boxes.



Below is a complete list of foods that contain glyphosate residues. I’ve combined data from both the report EWG released, as well as the reports released from Food Democracy Now! and the group’s “Detox Project.”

glyphosate-in-food

EWG Report (source):

• Granola
– Back to Nature Classic Granola– Quaker Simply Granola Oats, Honey, Raisins & Almonds– Back to Nature Banana Walnut Granola Clusters– Nature Valley Granola Protein Oats ‘n Honey– KIND Vanilla, Blueberry Clusters with Flax Seeds
• Instant Oats– Giant Instant Oatmeal, Original Flavor
– Quaker Dinosaur Eggs, Brown Sugar, Instant Oatmeal
– Umpqua Oats, Maple Pecan– Market Pantry Instant Oatmeal, Strawberries & Cream

• Oat Breakfast Cereal
– Cheerios Toasted Whole Grain Oat Cereal– Lucky Charms– Barbara’s Multigrain Spoonfuls, Original, Cereal– Kellogg’s Cracklin’ Oat Bran oat cereal
• Snack Bars
– KIND Oats & Honey with Toasted Coconut– Nature Valley Crunchy Granola Bars, Oats ‘n Honey– Quaker Chewy Chocolate Chip granola bar– Kellogg’s Nutrigrain Soft Baked Breakfast Bars, Strawberry
• Whole Oats
– Quaker Steel Cut Oats– Quaker Old Fashioned Oats– Bob’s Red Mill Steel Cut Oats– Nature’s Path Organic Old Fashioned Organic Oats– Whole Foods Bulk Bin conventional rolled oats– Bob’s Red Mill Organic Old Fashioned Rolled Oats (4 samples tested)

EWG Second Report (source):

– Quaker Simply Granola Oats
– Quaker Instant Oatmeal Cinnamon & Spice
– Quaker Instant Oatmeal Apples & Cinnamon
– Quaker Real Medleys Super Grains Banana Walnut
– Quaker Overnight Oats Raisin Walnut & Honey Heaven
– Quaker Overnight Oats Unsweetened with Chia Seeds
– Quaker Oatmeal Squares Brown Sugar
– Quaker Oatmeal Squares Honey Nut
– Apple Cinnamon Cheerios
– Very Berry Cheerios
– Chocolate Cheerios
– Frosted Cheerios
– Fruity Cheerios
– Honey Nut Cheerios
– Cheerios Oat Crunch Cinnamon
– Quaker Chewy S’mores
– Quaker Chewy Peanut Butter Chocolate Chip
– Quaker Breakfast Squares Soft Baked Bars Peanut Butter
– Quaker Breakfast Flats Crispy Snack Bars Cranberry Almond

Moms Across America (source): 

– Tropicana Orange Juice– Minute Maid Orange Juice– Stater Bros Orange Juice– Signature Farms Orange Juice– Kirkland Orange Juice

Food Democracy Now! and The Detox Project (source):

– Original Cheerios– Honey Nut Cheerios– Wheaties– Trix– Annie’s Gluten Free Bunny Cookies Cocoa & Vanilla– Kellog’s Corn Flakes– Kellog’s Raisin Bran– Kashi Organic Promise– Kellog’s Special K– Kellog’s Frosted Flakes– Cheez-It Original– Cheez-It Whole Grain– Kashi Soft Bake Cookies, Oatmeal, Dark Chocolate– Ritz Crackers– Triscuit Crackers– Oreo Original– Oreo Double Stuf Chocolate Sandwich Cookies– Oreo Double Stuf Golden Sandwich Cookies– Stacy’s Simply Naked Pita Chips (Frito-Lay)– Lay’s: Kettle Cooked Original– Doritos: Cool Ranch– Fritos (Original) (100% Whole Grain)– Goldfish crackers original (Pepperidge Farm)– Goldfish crackers colors– Goldfish crackers Whole Grain– Little Debbie Oatmeal Cream Pies– Oatmeal Cookies Gluten Free– 365 Organic Golden Round Crackers– Back to Nature Crispy Cheddar Crackers

Other Brands/Products and Miscellaneous:

– Ben & Jerry’s Ice Creams (source)– Tampons (source)– Non-organic cotton clothing products (source)– Rainwater (source)– Groundwater supplies (source)

How To Steer Clear of Glyphosate in Foods

Glyphosate contamination cannot be removed by washing (it is absorbed into the plant while it’s growing). It also is not broken down by cooking or baking.
In order to avoid glyphosate in food, follow the pointers below:

1. Always Look for Non-GMO Project Verified

If you’re purchasing a processed food item (that is, something boxed, bagged or canned), you can make sure it doesn’t contain GMO ingredients by looking for the Non-GMO Project Verified symbol (see below).

2. Certified Organic is Better Than Non-Organic

By purchasing certified organic foods, you’ll be rest assured that your food doesn’t contain any glyphosate-containing chemicals. Unfortunately, glyphosate use is so rampant, that some organic foods may contain small amounts of glyphosate residues (say, from neighboring crops). The good news is that organic foods contain much lower levels of glyphosate compared to their conventional counterparts.

3. Look for Glyphosate Residue Free Labels

The Detox Project, a research and certification platform that uses an FDA-registered food-testing lab to test for toxic chemicals launched their own “Glyphosate Residue Free” label. This label offers more transparency and assures the purchaser that they’re not getting any glyphosate in the food they’re buying. While these labels aren’t mainstream, the Detox Project is working with food manufacturers and grocery chains to get this label on more products.


Saturday, December 9, 2017

Good cholesterol is not problem but white sugar is

Good news:
All you Lipitor users rejoice!


*Cholesterol* is finally officially removed from Naughty List. The US government has finally accepted that *cholesterol* is not a _nutrient of concern_. *doing a U-turn* on their warnings to us to stay away from high-cholesterol foods since the 1970s to avoid heart disease and clogged arteries.

This means eggs, butter, full-fat dairy products, nuts, coconut oil and meat have now been classified as *safe* and have been officially removed from the _nutrients of concern_ list.

The US Department of Agriculture, which is responsible for updating the guidelines every five years, stated in its findings for 2015: "Previously, the Dietary Guidelines for Americans recommended that cholesterol intake be limited to no more than 300 mg/day.

"The 2015 DGAC will not bring forward this recommendation because available evidence shows no appreciable relationship between consumption of dietary cholesterol and serum (blood) cholesterol, consistent with the AHA/ACC (American Heart Association / American College of Cardiology)

The Dietary Guidelines Advisory Committee will, in response, no longer warn people against eating high-cholesterol foods and will instead focus on sugar as the main substance of dietary concern.

US cardiologist Dr Steven Nissen said: _It's the right decision_. _We got the dietary guidelines wrong. They've been wrong for decades_."

When we eat more foods rich in this compound, our bodies make less. If we deprive ourselves of foods high in cholesterol - such as eggs, butter, and liver - our body revs up.

The Real Truth about Cholesterol. The majority of the cholesterol in you is produced by your liver. Your brain is primarily made up from cholesterol. It is essential for nerve cells to function.

Cholesterol is the basis for the creation of all the steroid hormones, including estrogen, testosterone, and corticosteroids.

*High cholesterol in the body is a clear indication which shows the liver of the individual is in good health.*

Dr. George V. Mann M.D. associate director of the Framingham study for the incidence and prevalence of cardiovascular disease (CVD) and its risk factors states:
 _Saturated fats and cholesterol in the diet are not the cause of coronary heart disease. *That myth is the greatest deception of the century, perhaps of any century*_

*Cholesterol is the biggest medical scam of all time*
There is no such thing as *bad Cholesterol*

So you can stop trying to change your Cholesterol level. Studies prove beyond a doubt, cholesterol doesn't cause heart disease and it won't stop a heart attack.

*The majority of people that have heart attacks have normal cholesterol levels.*

OUR BODY NEEDS 950 mg OF CHOLESTEROL FOR DAILY METABOLISM AND THE LIVER IS THE MAIN Producer. ONLY 15% OF CHOLESTEROL IS BEING DONATED BY THE FOOD WE EAT.

If the fat content is less in our food we eat, our liver
Got to work more to maintain the level at 950 mg.

*If the cholesterol level is high in our body, it shows the liver is working perfect.*

Experts say that there is nothing like LDL or HDL.
…………..
….. *Cholesterol is not found to create block any where in human body*.

Please share the recent facts about CHOLESTEROL
Washington Post

Sunday, December 3, 2017

You are consuming cancerous vegetable oil.

All these cooking oils are processed to death with chemical solvents, steamers, neutralizers, de-waxers, bleach and deodorizers before they are bottled. If you read the label of any of these oils, you will find the quantities of carbohydrates, protein, fats, sodium etc. and their daily value percentage. But have you been told that this so-called vegetable oil which according to a US health authority, is fit for human consumption, also has very dangerous and toxic ingredients which have been used to process this product? No. Why? What you have not been told is that the “solvent” used to extract the oils is the Neurotoxin Hexane and it's literally bathed in it.
Hexane is a cheap by-product of gasoline production that is a serious toxic air pollutant. A lot of Hexane residue is left behind in the oil and guess what, the FDA does not require food manufacturers to test before residue! Residue tests done by the Cornucopia Institute in 2009 found Hexane residues in soybean oil. This is not limited to soybean oil, all vegetable oils (excluding coconut oil) have hexane residue in them. So including me, all of you have been eating hexane and feeding it to your loved ones too, all in the name healthy choices. 
So one might ask “what about cold pressed oils”?
Although this traditional way of making oil is much healthier than Hexane, the big oil manufacturers don’t like the method because it is less effective (less oil is made) andmore expensive. The expeller pressing process can cause a lot of heat and make the oil go rancid, so some companies take it a step further and “cold” press their oils at no more than 26.66ºC to 48.88ºC. The term cold pressed is quite well-regulated in Europe but not very well regulated in the US and “cold pressed” oils could technically be made at high temperatures. In Asia, this regulation is pretty much non-existent.
Rapeseed oil has a lot of Erucic acid, which was known to cause Heart disease so they gave it a fancy new name of Canola. Canola oil still has good amounts of Erucic acid(more than 2%). In 1995, production of genetically engineered (GMO) rapeseeds began to be resistant to herbicides, and now almost all canola and soybean crops in North America are GMO. Most countries in Asia are generally following that path.
GMO Rapeseeds are heavily treated with pesticides. These are heated to unnaturally high temperatures that they oxidize and are rancid before you even buy them.
They are processed with a petroleum solvent, Hexane, to extract the oils. Then they are heated even more and some acid is added to remove any nasty wax solids that formed during the first processing. Then the oil is treated with more chemicals to improve colour. Unlike coconut oil and olive oil, these newly fangled oils have been extracted in the most unnatural ways.
At the turn of the 20th century, the amount of vegetable oils being consumed was practically zero. Today the average amount of consumption is 70 lbs a year, per person. You do not have to cook in these oils to consume them, they are in every conceivable processed food. Condiments, ketchup, health bars, chips, cereals… you name it and it has it. 
I have a very simple attitude towards food, if a human packed it, don’t have it. Do not buy processed foods, make your own, fresh, from scratch. The excuse of time is basically cheating on yourself.
So why are these oils so dangerous you might ask? Okay, let me try to concise and simplify this explanation as much as I possibly can.
You need to have a ratio of Omega 6 to Omega 3 fatty acids to get optimum benefits. It is absolutely essential for your body to get these fatty acids from your diet but it must get them in a certain balance. When the balance of Omega 6 and Omega 3 is off, things can go horribly wrong. 
Polyunsaturated fats tend to react with oxygen which can cause chain reactions damaging other structures and even vital structures like DNA. These fatty acids tend to sit in the cell membranes, increasing harmful oxidative chain reactions. Excessive consumption of vegetable oils leads to actual structural changes within our fat stores and our cell membranes. Eicosanoids, the signalling molecules made from enzymatic oxidation of Polyunsaturated fats, are pro-inflammatory and those made from Omega 3 are anti-inflammatory. Having a diet high in Omega 6 and low in Omega 3 is then a recipe for unimaginable disaster. Simplify it further and you get this – a diet comprising of vegetable oils (whether used directly in cooking or thru processed foods) will make you miserably sick and a diet with Ghee or coconut oil (without any processed food whatsoever) will keep your balance, mostly towards healthy.

Over consuming Omega 6 and under consuming Omega 3 will significantly increase:

Heart disease
Obesity
Metabolic Syndrome or pre-diabetes
type 2 Diabetes
Irritable Bowel Syndrome and Inflammatory bowel syndrome
Macular degeneration (eye damage and blindness)
Rheumatoid arthritis
Asthma
Hypertension
Psychiatric disorders
Autoimmune disease
Reproductive disorders
Low birth rate
Hormonal disorders
Kidney and Liver damage
Infertility
Cancer
I’ve not covered all of them, this is just the tip of the iceberg. Please banish these oils completely from your home: Canola oil, Soybean oil, Vegetable oil, Sunflower oil, Safflower oil, Peanut oil, Corn oil, Cottonseed oil, Grapeseed oil, Margarine, Shortening, any fake butter substitute.
Understand that if these oils are actually beneficial for anyone then its only the oil manufacturers, that’s it!
So what should you have instead? Indians please go back to your celestial blessing – Ghee.
The rest of you can get organic unrefined virgin coconut oil for cooking with heat and organic Olive oil as a cold additive to your foods.

Monday, November 27, 2017

Hair loss and growth-

This article is published in another site and this is a copy of that -
http://flip.it/pJye2g
When it comes to preventing hair loss or improving the hair that someone already has, there are plenty of natural methods that help.
There are a variety of home remedies that people use to try and regrow their hair. However, it is important to remember that research to support such methods is not always extensive.

Massage

A study conducted in Japan showed that scalp massage could increase hair thickness. The men involved in the study had regular massages over a 24-week period, and while hair growth rate did not improve, thickness improved significantly.
Researchers believe that this could be to do with increased blood flow and direct stimulation of the cells.


Nutrition

While hair loss can be affected by nutrient deficiency, the exact links between diet and hair loss are complicated:
  • Iron: Iron deficiency is the most common nutritional deficiency in the world and is a known cause of hair loss. Women experiencing perimenopause and menopause are at risk of iron deficiency, as are vegans, vegetarians, and people with certain conditions, such as celiac disease. In a study on mice, the reversal of iron deficiency also leads to the restoration of hair growth.
  • Zinc: Zinc deficiency has a direct link with brittle hair, and increasing zinc levels also leads to the regrowth of hair. However, researchers do not know whether zinc supplementation would help those without diagnosed zinc deficiency.
  • Fatty acids: A deficiency in essential fatty acids can lead to hair loss on the scalp and eyebrows.
  • https://www.medicalnewstoday.com/
It is important to remember that there is a lack of research on the role of supplementation. Researchers do not know whether supplements will prevent hair loss in people that do not have nutrient deficiencies.
In fact, the over supplementation of certain nutrients, such as vitamin A, vitamin E, and selenium, can lead to hair loss.

Stress



There appears to be a direct link between stress and hair loss. Likewise, a shock to the system, be that through physical or emotional trauma, can also act as a shock to the hair follicles and they can stop growing.
In some cases, the use of red ginseng, which can be taken as a supplement, has been shown to promote hair growth.
Exactly why this happens is unclear, although researchers think it could be because of indirect stimulation of the hair follicles.
Before taking any supplements, it is important to ensure that they won't interact with any medication or existing conditions.

Fatty acid

The omega-6 fatty acid arachidonic acid has been shown to promote hair growth by helping to speed up the production of the follicles.

Viviscal

This natural hair growth supplement was shown to promote hair growth in women experiencing temporary thinning. However, a further study also showed its ability to decrease hair loss.

Geranium oil

The use of geranium oil as a treatment significantly promotes hair growth and can prevent hair loss. People can apply it by mixing a few drops into a shampoo or conditioner.

Coconut oil

Coconut oil is widely used to treat damaged hair of various types. It significantly reducesthe protein loss in both damaged and undamaged hair as it can penetrate the hair shaft.
Coconut oil can be used as a pre-wash and a post-wash wash hair product.

Aloe vera

The use of aloe vera as a treatment for a variety of different things has been traced back as far as 6,000 years ago in Ancient Egypt.
One such treatment is for hair loss, and evidence has shown it has a soothing effect on the skin that can help alleviate certain conditions.

Rosemary oil

Using rosemary oil for at least 6 months has been shown in a study to increase hair count. However, many of the group experienced scalp itching as a side effect.