Saturday, December 5, 2015

Ayurvedic blood pressure therapy

Sarpagandha Ghan Vati – A Wonderful Herbal Tablet for Blood Pressure
Sarpagandha Ghan Vati consists of tablets made from the pure extract of Sarpagandha which is known as Rauwolfia serpentina. It is a herbal supplement prepared as per ancient Ayurvedic texts. It is efficient in dealing with problems like insomnia, high blood pressure, hysteria and psychological disorders. It aids in regulating high blood pressure and maintaining the right balance of myocardial oxygen. Sarpgadhaghan Vati is completely natural and safe to use.
Sarpagandha has been in use since ages as a medicine for relieving hypertension. It is bitter in taste and has sedative properties. In ancient times it was used as a remedy for snake bites. It is also known with the name Indian snakeroot. It is effective in relieving insomnia and ailments related to central nervous system. Over 20 alkaloids are present in this herb. The important alkaloid known as reserpine is useful as a tranquilizer and acts as a hypotensive agent prescribed for relieving psychoneurotic conditions.
It is useful in relieving hysteria, epilepsy, anxiety and schizophrenia. The catecholamines which comprise of dopamine, noradrenaline and adrenaline hormones are responsible for increased blood pressure and increase in the heart rate. The alkaloid reserpine helps to lower the effect of these catecholamines. It is helpful in lowering blood pressure and calming the nerves.

Therapeutic Uses of Sarpagandha Ghan Vati:

  • It is widely used to regulate high blood pressure.
  • Sleeplessness or insomnia can be relieved effectively with the help of these capsules.
  • Epilepsy can also be relieved with this medicine.

Ingredients Used in the Preparation of Sarpagandha Ghan Vati:

S. No.Ingredient- International NameCommon NameQuantity
1Rauwolfia serpentinaSarpagandha500mg
Ref. Ayurvedic Text – Siddha Yoga Sangraha/Chapter of Insomnia, Mania and Anxiety

Who Can Use Sarpagandha Ghan Vati

People suffering from high blood pressure, insomnia or epilepsy can easily use this herbal remedy and find relief.
This herbal formulation is prepared as per ancient Ayurvedic treatises and modern GMP standards in an ISO 9001:2008 factories.

Dosage:

One tablet should be consumed along with plain water, two times in a day.

Product Details

  • Product Form: This product comes in tablet form.
  • Package Type: Bottled pack.
  • Package Quantity: Every bottle contains 120 tablets.
  • Available in sets of 2, 3, 5 and 10 bottles.
  • These are free from chemicals, preservatives, yeast, pesticides, microbes, heavy metals, fillers, starch, raw powders etc.

Side Effects:

Prolonged use of this medicine is not recommended as it may lead to a fall in the blood pressure. It should be used for one month duration and later stopped. It is always better to consult a qualified Ayurvedic medical practitioner before starting this herb.

Advantages of Using Sarpagandha Ghan Vati by Planet Ayurveda

Planet Ayurveda has manufactured this unique herbal formulation as per industry standards and there are several reasons which make it superior to any other similar products available in the market. They are:
  • Wild crafted and organically cultivated herbs are used in the preparation of this capsules and no hard gelatin or chemicals are used.
  • To maintain higher standards, organic products are used.
  • No artificial flavors, yeast, fillers or preservatives are used in the manufacturing of this product.
  • We never encourage testing of our products on animals.
  • The product uses only standardized herbs of our 100 percent natural herbal powders.
  • Use of only high quality organic products is done to ensure better health results.
  • It is a high quality product available at competitive prices.
  • This product is 100 percent pure vegetarian.
  • It is made out of pure, natural and safe ingredients.
  • It does not cause any side effects.
सर्पगंधा यह नाम ही आपको चौंका रहा होगा । 

सर्पगंधा अर्थात वह वस्तु जो सर्पों को दूर भगाए। इसकी गंध से सांप दूर भागते हैं। इस पौधे में अदभुत शक्ति है। लेकिन जानकारी के अभाव में लोग इसका लाभ नहीं ले पाते हैं। कहा जाता है कि जिस घर के अहाते में सर्पगंधा का पौधा लगा हो, वहां विषैले जीव-जंतु प्रवेश नहीं करते। ये पौधा विषैले जीवों का सबसे बड़ा दुश्मन माना जाता है। इसके प्रभाव से सांप, बिच्छूत दूर भागते हैं। वैसे भी गर्मी के दिनों में बिच्छू  अधिक निकलते हैं। जिसके डंक से आदमी की हालत बिगड़ जाती है। लेकिन इस पौधे को लगाकर इनसे बचा जा सकता है। इस पौधों को गमला में भी लगाया जा सकता है। इसके तने को रोपने से ये पौधा लग जाता है। इसकी ऊंचाई 10 फीट तक होती है। ये कांटेदार होता है। सुनने में अजीब लगता है, लेकिन इसका असर लगभग 100 मीटर तक रहता है। देहाती क्षेत्रों में सैकड़ों लोग इस पौधे का लगातार लाभ ले चुके हैं। इतना ही नहीं ये पौधा उच्च  रक्तचाप, अनिद्रा, पागलपन व उन्माद जैसे रोगों की अचूक दवा है। जानकार लोग आज भी इसका बखान करने से नहीं थकते हैं। 

इसकी जड़ों में ''रिसर्पिन '' नामक एल्केलाईड पाया जाता है जो उच्च रक्तचाप की अचूक दवा है। इसके अलावा २६ एल्केलाइड्स और पाये जाते हैं जो भिन्न-भिन्न रोगों के उपचार में काम आते हैं। ये हैं--सरपेनटाईन ,सरपेंटाअनाईन , अज्मेलाईन ,अजमेलिसाईन , रवोल्फिनाईन ,योहिम्बाइन ,रेसिनेमाइन ,डोज़र्पिदाइन वगैरा। इसकी जडों में स्टार्च तथा रेजिन पाया जाता है । इसकी जड़ों से बनाई जाने वाली भस्म में पोटेशियम कार्बोनेट ,फास्फेट ,सिलिकेट ,लोहा तथा मैगनीज मौजूद होते हैं ।
पूरे विश्व में इसकी सूखी जड़ों की सलाना मांग २०,००० टन की है .हालांकि श्रीलंका ,थाईलैंड ,बर्मा ,पाकिस्तान आदि देशों में भी यह पैदा होता है किंतु भारतीय सर्पगंधा को सबसे अच्छा माना जाता है। इसका उपयोग पूरे विश्व में केवल परंपरांगत ही नहीं बल्कि आधुनिक चिकित्सा पद्धतियों में भी धड़ल्ले से किया जाता है ।
उपयोग-------

1-हांई ब्लड प्रेशर के उपचार हेतु सर्पगंधा सम्पूर्ण विश्व में सर्वोत्तम औषधि मानी जाती है । इसके उपयोग से उच्च रक्तचाप में जादुई कमी आती है,नींद भी अच्छी आती है तथा भ्रम आदि मानसिक विकारों में भी आराम मिलता है । यदि आपको उपरोक्त तकलीफें हैं तो सर्पगंधा की जड़ के चूर्ण का आधा छोटा चम्मच दिन में दो या तीन बार सेवन कीजिये ,परिणाम मनोनुकूल मिलेगा ।

२--------अगर आप अनिद्रा के रोगी हैं तो रात को सोने के समय १/४ छोटा चम्मच सर्पगंधा की जड़ का पावडर घी के साथ मिला कर खा लें, नींद आ जायेगी। खांसी वाले रोगियों की अनिद्रा में भी यह लाभदायक है ।

३-------परंपरांगत चिकित्सा में सर्पगंधा का प्रयोग पागलपन की दवा के रूप में भी किया जाता रहा है । उन्माद और अपस्मार में जब रोगी बहुत अधिक उत्तेजना का शिकार हो जाता है तो एक ग्राम चूर्ण २५० मिलि० बकरी के दूध के साथ खिलाएं ,चूर्ण में गुड मिला लें यह दिन में 2 बार दीजिये, आराम दिखायी देगा । 

किंतु यह दवा लो ब्लड प्रेशर वालों के लिए नहीं है।

नाम-------हिन्दी में धवलबरुआ ,चंद्रभागा ,छोटा चाँद ..........संस्कृत में सर्पगंधा ,धवल विटप , चंद्रमार ,चन्द्रिका ............बिहार में धनमरवा ,चंदमरवा ,इसरगज .................उड़िया में पातालगरुड़ ............बंगाली में चान्दर्ण ..............मराठी में साय्सन ,अद्कई ..............गुजराती में अमेल्पोदी
...........तेलगू में पातालागानी.............. तमिल में चिवनअमलपोडी ,सर्प्गंठी ............मलयालम में चिवन , अवाल्पोदी ..............कर्णाटक में सुत्रनावी आदि नामों से पुकारा जाता है जबकि इसका वैज्ञानिक नाम है ----रावोल्फिया सर्पेतिना ।
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